हाथरस प्रकरण में योगी सरकार दो कदम आगे-चार कदम पीछे

उत्तर प्रदेशहाथरस प्रकरण में योगी सरकार दो कदम आगे-चार कदम पीछे

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हाथरस प्रकरण में योगी सरकार दो कदम आगे-चार कदम पीछे

  • चौतरफा दबाव से घिरी सरकार अपनी छवि सुधारने का कर रही प्रयास
  • राहुल-प्रियंका गांधी को पहले रोका, फिर खुद पीड़ित परिवार से मिलाया
  • पीड़ित परिवार से मिले अधिकारी, सरकार ने की सीबीआई जांच की सिफारिश

सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। हाथरस में युवती के साथ हैवानियत के प्रकरण में योगी सरकार दो कदम आगे-चार कदम पीछे वाली स्थिति में दिखाई दे रही है। दो दिन पहले राहुल-प्रियंका गांधी को हाथरस जाने से रोकने वाली योगी सरकार ने जनता के आक्रोश और खुद की पार्टी से खिलाफत में उठने वाली आवाज के दबाव में आज राहुल-प्रियंका को हाथरस जाने और पीड़ित परिवार से मिलने की इजाजत दे ही दी।

सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को ढाढस बंधाया तो योगी सरकार ने हाथरस प्रकरण में सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। जाहिर है चैतरफा दबाव अब योगी सरकार पर हावी हो रहा है और वह इस जंजाल से निकलने के लिये हर संभव प्रयास कर रही है।

14 सितंबर को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक दलित युवती के साथ की गयी हैवानियत ने पूरे देश को गम और आक्रोश से भर दिया था। पीड़िता ने बयान में चार आरोपियों के नाम लिये थे जिन्हें पुलिस ने गैंगरेप की धारा में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता ने दम तोड़ दिया था। जिसके बाद पुलिस ने रात के अंधेरे में गांव की घेराबंदी कर पीड़िता के शव का जबरन अंतिम संस्कार करा दिया था।

मृतका के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें बेटी को चेहरा भी नहीं देखने दिया। पीड़िता की मौत और अंतिम संस्कार को लेकर पुलिस के तरीके के खिलाफ प्रदेश भर में जनआंदोलन शुरू हो गये। एक ओर जहां विपक्षी पार्टियों ने सरकार की घेराबंदी की वहीं आमजन का आक्रोश भी सरकार के खिलाफ हो गया। वहीं मंगलवार को पीड़ित परिवार से मिलने के लिये हाथरस जाते समय राहुल और प्रियंका गांधी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी ने अपने साथ्थ दुव्र्यवहार का आरोप भी लगाया था।

पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के बलबूते मामले को संभालने की नीति योगी सरकार के लिये ही उल्टी पड़ गयी। भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने ट्वीट कर लिखा की जिस प्रकार से पुलिस ने गाव की एवं पीड़ित परिवार की घेराबंदी की है उसके कितने भी तर्क हो लेकिन इससे विभिन्न आशंकाएं जन्मती हैं। उमा भारती ने कहा कि आप एक बहुत ही साफ-सुधरी छवि के शासक हैं। मेरा आपसे अनुरोध है कि आप मीडियाकर्मियों को एवं अन्य राजनीतिक दलों के लोगों को पीड़ित परिवार से मिलने दीजिये ।

अपनी ही पार्टी में उठे खिलाफत के सुर अपनी छवि पर भारी पड़ते देख योगी सरकार ने चंद पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर कड़ी कार्रवाई करने का संदेश दिया। वहीं शनिवार को अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी और डीजीपी हितेष अवस्थी ने गांव बूलगढ़ी में पीड़िता के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें न्याय और सुरक्षा दिलाने का आश्वासन दिया। शनिवार को ही राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को खुद सरकार के अधिकारियों ने साथ ले जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात कराई। वहीं शनिवार को ही योगी सरकार ने इस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की है।

सरकार द्वारा डेमैज कंट्रोल का किया जा रहा प्रयास सही मगर देर से उठाया कदम है। हाथरस प्रकरण में मृतका के शव के जबरिया अंतिम संस्कार को किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता। वहीं जनआंदोलन के बाद जागी सरकार ने चंद पुलिस अधिकारियों को मृतका की मौत के बाद निलंबित किया। यदि यही कार्य पहले किया जाता तो शायद सरकार पर इतने सवाल नहीं उठते। वहीं दो दिन पहले राहुल-प्रियंका को रोकना और फिर उनकी पीड़ित परिवार से मुलाकात करना जाहिर करता है कि सरकार बैकफुट पर है। योगी सरकार को अभी अपनी ही पार्टी यानी भाजपा में उठ रहे सवालों का भी जवाब देना है और जनता के बीच अपनी छवि को बचाये रखना है। वहीं विपक्षी पार्टियों खासकर कांग्रेस को इस प्रकरण को मुद्दा बनाने से रोकना भी सरकार के लिये एक चुनौती है। क्योंकि यह मुद्दा यदि जनआंदोलन का रूप ले गया तो इसकी आंच सत्ता सिंहासन तक पहुंचना तय है।

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