बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना जरूरी

उत्तराखंडबच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना जरूरी

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बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना जरूरी

माॅस सप्लीमेंटेशन शुरू कर जिंक और विटामिन बी की खुराक दी जानी चाहिये
कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिये बनाई रणनीति

देहरादून। कोरोना की संभावित तीसरी लहर कितनी गंभीर होगी और वह बच्चों को किस प्रकार प्रभावित करेगी यह कह पाना मुश्किल है। मगर संभावनाओं के आधार पर इससे निपटने और संक्रमित होने पर बच्चों को उपचार देने के लिये पहले ही तैयारियां शुरू कर देनी चाहिये। बच्चों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिये मास सप्लीमेंटेशन शुरू करना होगा। प्रोफाइलेक्सिस की प्रभावी रणनीति बनाने के लिये आईसीएमआर और डब्लूएचओ व अन्य संस्थाओं से सुक्षाव लिये जायें। स्वास्थ विभाग की टास्क फोर्स की बैठक में बताया गया कि अब तक बच्चों में गंभीर कोविड न्यूमोनिया के लक्षण नहीं दिखे हैं जो राहत की बात है।

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण दर और कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या में कमी आती जा रही है। लेकिन कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना ने स्वास्थ्य विभाग को चिंतित किया हुआ है। आशंका जताई जा रही है की कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की टास्क फोर्स ने संभावित हालातों से निपटने के लिए रणनीति बनाने शुरू कर दिया है। बुधवार को एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅक्टर हेमचंद्रा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बच्चों को कोरोना की तीसरी लहर से बचाने के लिए मंथन किया गया

बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिये अभी से तैयारियां शुरू करनी होगी। इसमें पहला कदम बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करना होना चाहिये। माॅस सप्लीमेंटेशन शुरू कर जिंक और विटामिन बी की खुराक दी जानी चाहिये। वहीं संक्रमित होने पर बच्चों को दिये जाने वाले इलाज के लिये अभी से बेड, आॅक्सीजन, वेंटिलेटर, दवाओं की उपलब्धता आदि की व्यवस्था कर लेनी चाहिये। हालांकि अब तक उत्तराखंड में कोरोना से संक्रमित बच्चों में गंभीर लक्षण देखने को नहीं मिले हैं लेकिन संभावनाओं के आधार पर पहले से ही तैयारी करना आवश्यक है।

बैठक में कहा गया कि बच्चों का टीकाकरण जल्द शुरू कर उनको वैक्सीन की दोनों डोज जल्द देने का प्रयास करना होगा। निजी और सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर का संचालन, आईसीयू में देखभाल और अन्य परिस्थिति में उपचार देने के लिये स्वास्थ्य कर्मियों और अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिये। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि पूर्व की तैयारियां, भविष्य में संक्रमितों को जल्द राहत दिलाने में काम आयेंगी।

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