NPS थी तो UPS क्यों?

आर्टिकल/इंटरव्यूNPS थी तो UPS क्यों?

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तौकीर सिद्दीक़ी
केंद्र की मोदी सरकार अपने पिछले कार्यकाल में सरकारी कर्मचारियों के लिए NPS के नाम से नई पेंशन स्कीम लेकर आयी था. बड़ा हंगामा हुआ था, बड़ा शोर शराबा हुआ था, विपक्ष की तरफ से भी और सरकार की तरफ से भी. ज़ाहिर सी बात है कि सत्ता पक्ष ने इसे एक क्रन्तिकारी कदम बताया था जैसा कि वो अपने हर काम को बताती रही है और विपक्ष ने विनाशकारी। इसके बाद देश में OPS यानि पुरानी पेंशन स्कीम एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गयी जो आज भी है. इतना बड़ा मुद्दा कि भाजपा की हिमाचल में हार ने इस मुद्दे ने बड़ी भूमिका भी निभाई। यहाँ तक कि लोकसभा चुनाव में भी OPS कई राज्यों में एक मुद्दा रहा और वहां भाजपा को नुक्सान भी हुआ, विशेषकर हरियाणा में जहाँ उसे आधी सीटें कांग्रेस को देनी पड़ीं क्योंकि कांग्रेस ने पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने का वादा किया था। यही नुक्सान उसे भाजपा को बहुमत से नीचे भी घसीट लाया। अब मोदी सरकार एक नई पेंशन स्कीम लेकर आयी है जिसे यूनिफाइड पेंशन स्कीम का नाम दिया है. हमेशा की तरह सरकार इस योजना को भी क्रांतिकारी कदम बता रही है वहीँ विपक्ष इसे अपनी जीत बता रहा है , उसका कहना है कि लोकसभा चुनाव में जिस तरह विपक्ष ने जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया उसकी वजह से ही जनता ने भाजपा से बहुमत छीन लिया और अब मजबूर होकर उसे जनता के बारे में सोचना पड़ रहा है और इसी वजह से सरकार ये पेंशन स्कीम लेकर आयी है. एक तरह से विपक्ष भी मान रहा है कि पेंशनर्स के लिए ये एक अच्छी स्कीम है हालाँकि वो सरकार के इस कदम को चुनावी मजबूरी भी बता रहा है. विपक्ष का कहना है कि OPS हरियाणा में बड़ा मुद्दा है, इसलिए हरियाणा चुनाव को देखते हुए सरकार को एक और पेंशन स्कीम लाने के लिए मजबूर होना पड़ा, विपक्ष का ये भी कहना है कि यूपीएस लाकर सरकार ने इस बात को मान लिया कि पिछले कार्यकाल में उसके द्वारा लाइ गयी NPS गलत योजना थी. बहरहाल ये तो राजनीतिक बातें हैं, चलिए हम थोड़ा इस नई पेंशन स्कीम के बारे में समझते हैं।

दरअसल सरकारी कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग में NPS को लेकर चिंता बढ़ती जा रही थी और वो लगातार पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे थे जिसे देखते हुए केंद्र सरकार एक वैकल्पिक पेंशन स्कीम UPS लेकर आयी। इस स्कीम का लाभ केवल उन्हीं केंद्रीय कर्मियों को मिल सकता है जो वर्तमान में NPS के सदस्य हैं, जिनमें सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं, सिर्फ उन्हें ही UPS का विकल्प चुनने की अनुमति होगी। तो अब सबसे बड़ा सवाल यह आता है कि क्या आपको NPS से यूनिफिएड पेंशन स्कीम में स्विच करना चाहिए? इस बारे में विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। उनके मुताबिक ये इस बात पर निर्भर करता है कि पेंशनभोगी इक्विटी मार्केट प्रकार के रिटर्न का लक्ष्य रखता है या गारंटीकृत आय को प्राथमिकता देता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर आप सरकार द्वारा और शेयर मार्किट द्वारा दिखाई जा रही भारत के विकास की कहानी में विश्वास करते हैं और रिटायरमेंट में अभी कई साल बाकी हैं, तो मौजूदा NPS से जुड़े रहने में फायदा है, क्योंकि भारतीय शेयर मार्किट उड़ान पर है और मार्केट रिटर्न भी जमकर मिल रहा है। वहीँ नई शुरू की गई यूपीएस में गारंटीड आय का लालच है। चूंकि यह योजना पिछले 12 महीनों में प्राप्त औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत प्रदान करती है, इसलिए यह कई सरकारी कर्मचारियों के लिए पर्याप्त मासिक पेंशन के बराबर हो सकती है। ऐसे में एनपीएस ग्राहक यूपीएस में शिफ्ट होने पर विचार कर सकते हैं ताकि कम से कम उनके रिटायरमेंट के बाद की बुनियादी जीवनशैली का ख्याल रखा जा सके।

दरअसल यूपीएस पूरी तरह से वित्त पोषित योजना है. कर्मचारी अपने बेसिक + महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत का योगदान इस योजना में देंगे। नियोक्ता का योगदान (यानि केंद्र सरकार) 14 % की जगह अब 18.5 प्रतिशत होगा। यूपीएस जैसी मुद्रास्फीति से जुड़ी योजना कर्मचारी के लिए ब्याज दर और दीर्घायु जोखिम को कम करती है क्योंकि अब इसका वहन सरकार करेगी। सरकार की गारंटी पर विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि यह एक परिभाषित लाभ और परिभाषित योगदान योजना का मिश्रण है, इसलिए फण्ड को बहुत सावधानी से प्रबंधित करना होगा। यूपीएस में यह शामिल है कि नियोक्ता और कर्मचारी दोनों कोष में योगदान करेंगे। सरकार द्वारा किए गए 18.5 प्रतिशत योगदान में से 8.5 प्रतिशत एक अलग कोष में जाएगा जिसे गारंटी आरक्षित निधि बताया गया है। प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में होने वाली वाली किसी भी कमी को पूरा करने के लिए इस रिज़र्व फण्ड का उपयोग किया जाएगा। इसलिए, फण्ड का अच्छी तरह से प्रबंधन बहुत ज़रूरी है।

एक महत्वपूर्ण बात ये है कि यूनिफिएड पेंशन स्कीम का प्रबंधन कौन करेगा, सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है, विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा लगता है कि यह पेंशन फंड नियामक प्राधिकरण के दायरे में आ सकता है। एक सवाल और कि यूपीएस पर किस तरह से टैक्स लगेगा? यहाँ अभी कोई स्पष्टता नहीं है, विशेषज्ञों का कहना है कि पेंशन आय पर आयकर दरों के हिसाब से टैक्स लगेगा। अब यह देखना होगा कि एकमुश्त भुगतान पर किस तरह से टैक्स लगेगा। एनपीएस के तहत तो पेंशनभोगियों को रिटायरमेंट के समय अपनी जमा राशि का 60 प्रतिशत एकमुश्त मिलता है। यह पूरी तरह से टैक्स फ्री है। शेष 40 प्रतिशत अनिवार्य रूप से बाजार में निवेश किया जाता है और पेंशनभोगी को मासिक पेंशन मिलती है जिस पर उनकी आयकर दरों के हिसाब से टैक्स लगता है।

अब सवाल फिर वही आता है कि आप अगर केंद्रीय कर्मचारी है तो आप क्या करें। सवाल थोड़ा मुश्किल है, मामला अभी ताज़ा ताज़ा है. एक्सपर्ट्स अपनी ओपिनियन दे रहे हैं लेकिन अभी उनके पास भी कुछ ज़्यादा स्पष्टता नहीं है. सवाल वही आता है कि जब सरकार के पास NPS थी तो वो यूपीएस क्यों लाई और फिर लाई तो विकल्प क्यों रखा. अगर यूपीएस कर्मचारियों की पेंशन से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान करती है तो फिर इसे अनिवार्य क्यों नहीं बनाया। पहली नज़र में तो यूपीएस में आकर्षण नज़र आता है लेकिन अभी अवलोकन हो रहा है, कमियां भी सामने आएँगी और ये बात भी सामने आएगी कि इस योजना को लाने के पीछे सरकार की नीयत और मंशा क्या है, हमें भी अभी थोड़ा इंतज़ार करना चाहिए।

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