बैंकों में जमा वृद्धि की धीमी रफ़्तार पर ICRA ने जताई चिंता

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बैंकों में जमा वृद्धि की रफ़्तार काफी धीमी हो गयी है, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण भी इस मुद्दे अपनी चिंता जता चुकी हैं और बैंकों को सलाह भी दी है कि जमा वृद्धि की रफ़्तार बढ़ाने के लिए ग्राहकों को कुछ आकर्षक पैकेजों की घोषणा करे. अब इस मुद्दे पर घरेलू रेटिंग एजेंसी ICRA ने भी चिनता जताई है। इक्रा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि धीमी जमा वृद्धि के कारण बैंक वित्त वर्ष 25 में बांड जारी करके 1.3 लाख करोड़ रुपये तक जुटाएंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमा और ऋण वृद्धि के बीच निरंतर अंतर के बीच बांड जारी करने की दर 1.2-1.3 लाख करोड़ रुपये के बीच होगी और यह सिस्टम के लिए अब तक की सबसे अधिक होगी। इक्रा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 85 प्रतिशत बांड जारीकर्ता सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक होंगे।

खबरों के मुताबिक, ऐसे उधारदाताओं के बीच इंफ्रा बॉन्ड के लिए अधिक रुचि बाजार को आगे बढ़ाएगी। इक्रा ने कहा कि तंग तरलता की स्थिति और ऋण वृद्धि लगातार जमा वृद्धि से आगे निकल रही है, जिससे बैंकों के लिए वैकल्पिक स्रोतों से धन जुटाने की आवश्यकता पैदा हुई है। बैंकों ने वित्त वर्ष 24 में बांड जारी करके 1 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जबकि पिछला सर्वकालिक उच्च वित्त वर्ष 23 में 1.1 लाख करोड़ रुपये था।

एजेंसी ने कहा कि चूंकि निजी बैंक अपने ऋण-से-जमा अनुपात को कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, इसलिए इस साल बॉन्ड के जरिए धन जुटाने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का दबदबा रहने की उम्मीद है। रेटिंग प्रमुख सचिन सचदेवा ने कहा कि बॉन्ड से धन जुटाने से निजी क्षेत्र के बैंकों के सीडी अनुपात में गिरावट आएगी, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक उपलब्ध पर्याप्त गुंजाइश को देखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड के जरिए विकास को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे। इसने कहा कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बैंकों का अग्रिम 30 जून, 2024 तक 13-14 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी लगभग 75 प्रतिशत है।

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