अमित बिश्नोई
न्यूज़ीलैण्ड के माउंट मॉन्गानुई में आज सूर्य खूब चमका, सूर्यकुमार यादव ने एकबार फिर दिखाया कि उनके लिए रोहित शर्मा की बात कितनी सही थी कि sky is the limit. सही भी था और आज एकबार फिर दिखा भी क्योंकि कोई भी कीवी गेंदबाज़ उन्हें आउट करने में कामयाब नहीं हो सका. जहाँ चाहा, जैसे चाहा सूर्या ने गेंद को सीमा रेखा के पार पहुँचाया, कभी ग्राउंडेड तो कभी हवा में. 111 रनों की पारी सिर्फ 51 गेंदों में यानि 200 से भी ज़्यादा स्ट्राइक रेट, 111 रनों की पारी में 86 रन सिर्फ चौकों और छक्कों से. जितनी भी तारीफ की जाय वो कम है, टीम का स्कोर 191 था तो यह पारी और भी बड़ी बन जाती है क्योंकि पचास प्रतिशत से ज़्यादा रन तो अकेले सूर्या के बल्ले से ही बने. यह तो कहिये कि अंतिम ओवर में सूर्या को मौका नहीं मिला वर्ना कुछ और आतिशबाज़ी भी देखने को मिलती।
आज SKY की इस आतिशी पारी की हर तरफ तारीफ हो रही है, चर्चा भी हो रही है. होनी भी चाहिए। टी 20 क्रिकेट में दो शतक लगाने वाले वो रोहित शर्मा के बाद दूसरे बल्लेबाज़ जो बने हैं. इसके अलावा एक कैलेंडर ईयर में सातवां प्लेयर ऑफ़ दि मैच का अवार्ड भी जीता है, कोहली के 6 अवार्ड का रिकॉर्ड भी ब्रेक किया है. तारीफ तो हर हाल में बनती है. लेकिन इन सबके बीच कहीं न कहीं टी20 विश्व कप के सेमी फाइनल में मिली हार एक टीस बनकर उभरती है और एक सवाल भी उभरता है कि काश यह शतक वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आया होता तो इस शतक की क्या बात होती। शायद पाकिस्तान के खिलाफ कोहली की पारी पर भी भारी होता वो शतक.
आप भी सोच रहे होंगे कि ख़ुशी के इस माहौल में दुखों की चर्चा क्यों? लेकिन यह सवाल है और बहुत बड़ा सवाल है. जहाँ पर सबसे ज़्यादा ज़रूरत वहां पर नाकामी क्यों? चौका अगर मौके पर लगे तो उसके क्या कहने वरना मैच के दौरान तो चौके लगते ही रहते हैं. हम सूर्या के इस शतक की अहमियत को कम नहीं आंक रहे हैं. शतक किसी भी लेवल में बने उसका महत्व अलग होता है लेकिन जब महत्वपूर्ण जगह पर बने तो उसका महत्व उससे भी ज़्यादा हो जाता है. खैर सूर्या को शतक मुबारक, उम्मीद है कि वह अभी और शतक बनाएंगे, रोहित का भी रिकॉर्ड ब्रेक करेंगे और साथ ही यह भी उम्मीद करेंगे कि अगली बार जब टीम इंडिया को सबसे ज़्यादा ज़रुरत होगी, आसमान पर सूरज चमकेगा।

