मुंबई: चक्रवाती तूफान निसर्ग बुधवार दोपहर को 120 किलोमीटर की गति से महाराष्ट्र में आने के बाद कमजोर होने लगा है। शाम तक इसकी तीव्रता कम हो जाएगी और देर रात तक खत्म हो जाएगा। इससे पहले चक्रवाती तूफान निसर्ग महाराष्ट्र के मुंबई में अलीबाग और रायगढ़ जिले के तट पर टकराया।
मुंबई में जनजीवन अस्तव्यस्त
तूफान निसर्ग की वजह से मुंबई में जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है. तूफान का सबसे ज्यादा असर रायगड में देखा जा रहा है और यहां भारी तबाही हुई है. बारिश के साथ तूफानी हवाओं ने पूरे शहर में जगह-जगह पेड़ों को गिरा दिया. नवी मुंबई में एक पेड़ चबूतरे के साथ ही उखड़ गया. वहीं रत्नागिरी में तूफानी हवाओं की चपेट में आकर एक छोटा जहाज रास्ता भटक गया, हालांकि बाद में इसे रेस्क्यू कर लिया गया.
भूस्खलन होने की आशंका
मुंबई में हो रही तेज़ बारिश और आंधी के चलते नरीमन प्वाइंट और कालाचौकी इलाके में पेड़ जड़ से उखड़ गए हैं और कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 129 साल बाद मुम्बई में चक्रवात आ रहा है। आईएमडी के अनुसार चक्रवात से राज्य में भूस्खलन होने की आशंका है।
रायगढ़, सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी में सबसे ज़्यादा असर
तूफान निसर्ग का सबसे ज्यादा असर रायगढ़, सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी जिले में देखने को मिल रहा है। तेज हवाओं ने कई जगहों पर तबाही मचाई है, जगह जगह पेड़ उखड़े हैं और बिजली सप्लाई पर भी इसका असर पड़ा है। चक्रवाती तूफान निसर्ग के कारण महाराष्ट्र में रत्नागिरि के तट के पास फंसे हुए एक पोत से बुधवार को कम से कम दस नाविकों को बचा कर निकाला गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ज्वार भाटे और भारी बारिश के कारण पोत मिरकवाड़ा के तट के पास चला गया था जहां से नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया।
मुंबई में तेज़ बारिश
मुंबई के निचले इलाकों में भारी बारिश के चलते पानी जमा होना शुरू हो गया है और दक्षिण मुंबई के इलाकों जैसे नरीमन पॉइंट में भी जोरदार हवाओं के साथ तेज बारिश हो रही है. मालाबार हिल इलाके से एक भयानक तस्वीर सामने आई जहां घर की छत का पूरा ऊपरी हिस्सा ही तेज हवाओं के चलते उखड़ गया. बीएमसी की दी गई जानकारी के मुताबिक शहर में जगह-जगह सड़कों पर पेड़ उखड़े हुए पड़े हैं और एनडीआरएफ की टीमों सहित अन्य राहत व बचाव टीमें इन्हें रास्तों से हटाने का काम कर रही हैं.
वरिष्ठ नागरिकों को याद आया 1948 का तूफ़ान
चक्रवात ‘निसर्ग’ से उत्पन्न खतरे के बीच कई वरिष्ठ नागरिकों ने 1948 में मुंबई में आए तूफान से हुई तबाही को याद किया है। तूफान ‘निसर्ग’ के बुधवार को अलीबाग के पास तट से टकराने की संभावना है। बुजुर्गों ने कहा कि 1948 में आए तूफान से व्यापक तबाही हुई थी। उस समय भीषण बारिश हुई थी और तेज हवाओं से जगह-जगह पेड़ उखड़ गए थे।
वर्तमान में पुणे में रह रहीं सुचेता नादकर्णी (81) उस समय मुंबई के विले पार्ले उपनगर में रहती थीं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे याद है कि हमारे इलाके में बड़े-बड़े पेड़ उखड़ गए थे और हमारे बगीचे में लगे पौधे नष्ट हो गए थे।’’ उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘उस समय मैं 10 साल की थी। मुझे यह बात इसलिए याद है क्योंकि मेरी मां अपने द्वारा लगाए गए पौधों के नष्ट हो जाने से बहुत दुखी हुई थीं।’’
इस संबंध में एक अन्य वरिष्ठ नागरिक ने कहा, ‘‘मुंबई (तत्कालीन बंबई) उस साल 22 नवंबर को भीषण तूफान के बाद पूरी तरह चरमरा गई थी। इसका कहर 20 घंटे तक जारी रहा था। शहर के अनेक हिस्सों में भीषण बारिश की वजह से बाढ़ आ गई थी।’’

