नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के विरोध में लगभग 15 महीने से दिल्ली की सीमाओं पर धरना दिया बैठे किसान कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के बावजूद अपने घर जाने को तैयार नहीं हैं। संयुक्त किसान मोर्चा किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों जैसे एसएसपी पर गारंटी कानून बनाए जाने और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाने आदि मांगों को पूरा हुए बगैर आंदोलन समाप्त करने को तैयार नहीं है। आज मंगलवार को भी संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में किसान आंदोलन की समाप्ति को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। लेकिन सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा सकारात्मक रवैया अपनाया गया है जिसको देखते हुए संभव है कि बुधवार को किसान आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी जाए।
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मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से किसानों को भेजे गये एक ड्राफ्ट में सरकार ने पराली जलाने पर आपराधिक धाराएं समाप्त करने और हरियाणा और यूपी में किसान आंदोलन के दौरान दर्ज हुए सभी मामले वापस लेने पर सहमति जताई है। हरियाणा और यूपी की सरकारों ने भी मुकदमें वापस लेने पर सहमति जताई है। केंद्र और केंद्र शासित प्रदेशों में भी किसानों पर दर्ज सभी मुकदमें वापस लिये जाने की बात भी कही गयी है। बताया गया कि केंद्र सरकार के इस रुख के बाद आठ दिसंबर यानी कल दोपहर होने वाली बैठक में किसान आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया जा सकता है।
इस बारे में भारतीय किसान यूनियन के नेता और किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने राकेश टिकैत का कहना है कि यदि किसानों की मांगें मान ली जाएंगी तो किसान आंदोलन समाप्त करने में देर नहीं लगाई जाएगी। होंगे। उन्होेंने कहा कि पीएम मोदी के ऐलान के बाद किसान आंदोलन अपने समाधान की ओर बढ़ चुका था। लेकिन इसके बावजूद आंदोलन को लेकर किसी निर्णय पर न पहुंच पाना दुख की बात है।
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राकेश टिकैत का कहना है कि यदि हमने मांगे पूरी हुए बगैर आंदोलन समाप्त कर दिया तो क्या किसान अपने ऊपर दर्ज मुकदमे समाप्त करने के लिए थाने जाने की हिम्मत जुटा पाएंगे। राकेश टिकैत का कहना है कि सरकार किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने का आश्वासन दे तो हम भी अपने घरों को चले जाएंगे। सरकार यह भी स्पष्ट कर दे की एमएसपी पर कानून बनाने वाली कमेटी में उनकी ओर से कौन-कौन लोग शामिल होंगे। राकेश टिकैत ने कल दोपहर दो बजे होने वाली बैठक में इस पर फैसला होने की बात कही।

