Hindu New Year 2022: कुड़ियाघाट पर सूर्य को जल चढ़ाकर होगी नव वर्ष की शुरुआत

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Hindu New Year 2022: कुड़ियाघाट पर सूर्य को जल चढ़ाकर होगी नव वर्ष की शुरुआत

2 अप्रैल से शुरु हो रहे हैं नवरात्र, चैत्र नवरात्र से प्रारंभ होता है हिंदू नव वर्ष

By bbnews

चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। घरों से लेकर मंदिरों में माता का दरबार सजाने के लिए अंतिम रूप दिया जा रहा है। चैत्र शुक्ल पक्ष से नवरात्र प्रारंभ होते हैं और उसी दिन हिंदू नव वर्ष भी प्रारंभ होता है पूर्णिमा के अवसर पर चंद्रमा जिस नक्षत्र पर होता है उसी के आधार पर 12 महीने के नाम भी रखे गए हैं। पूर्णिमा पर चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में होता है इसीलिए चैत्र नवरात्र प्रारंभ होता है। हिंदू मान्यताओं में सूर्य प्रत्यक्ष देवता है और नव वर्ष के प्रथम शुरू को जल अर्पण कर उनकी पूजा का विधान भी चला आ रहा है।

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सूर्य की पहली किरण के साथ

चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) के पहले दिन कुड़िया घाट पर एक खास नजारा देखने को मिलेगा। सुबह 4 बजे से लोग इस घाट पर जमा होकर मां की अराधना करते हैं। भजन गाता है तो कोई आरती। ऋद्धि किशोर गौड़ के अनुसार संस्कार भारती और श्री शुभ संस्कार समिति विगत 15 वर्षों से कुड़िया घाट पर नव वर्ष के प्रथम सूर्य को जल अर्पण करने का कार्यक्रम आयोजित करती आ रही है। इस दिन सुबह 4:00 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रारंभ हो जाता है और लगभग 5:30 बजे सूर्योदय की पहली किरण को अर्घ्य दिया जाता है उस दिन देवी पूजन में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है लाखों की संख्या में श्रद्धालु जो रोते हैं और दुर्गा जी की प्रतिमा का स्थापना कर 9 दिन तक विधि विधान से पूजन करते हैं।

दीपक होते हैं रोशन

ऋद्धि किशोर गौड़ कहते हैं कि चैत्र नवरात्र से हिंदुओं का नववर्ष (Hindu New Year 2022) शुरू होता है। पतझड़ के बाद पेड़ों पर नए पत्ते लहलहाते हैं, खेत में गेहूं की फसल लहलहाती है। सभी कुछ नया सा होता है। यही वजह है कि व्रत, उपवास पूजा के साथ हम नए वर्ष का स्वागत करते हैं। कलश की स्थापना की जाती है। सुबह जहां सूर्य को जल चढ़ाते हैं वहीं शाम को घर में पांच दीपक जलाए जाते हैं। इस बार पूरे नौ दिन का व्रत है। इसमें कुछ लोग पहला और आखिरी दिन व्रत रखते हैं और कुछ पूरे नसौ दिन के। घरों में आम दिनों में बनने वाले खाने का मेन्यू चेंज हो जाता है। इन दिनों गेहूं के आटे की जगह सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, सेंधा नमक और फलों को ही भोजन में शामिल किया जाता है।

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मनोकामनाएं होंगी पूरी

पंडित अनुज शुक्ला ने बताया कि वैसे तो साल में चार बार नवरात्री होती है। अषाढ़ व माघं में दो गुप्त नवरात्री होती है। इसके अलावा चैत्र के महीने में बासंतिक तो में शारदीय नवरात्री होती है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्री की शुरुआत हाती है। पंडित अनुज शुक्ला के अनुसार इस बार नवरात्रों का आरम्भ ऐो योग में हो रहा है कि मां दुर्गा भक्तों की सभी मानोकामनाएं पूरी करेंगी। नवरात्रों का प्रारम्भ सर्वार्थ सिद्घी और अमृत सिद्दभ् योग में हो रहा है। ऐसा माना जाता है कि यह दोनों की योग बहुत फलदायी हैं। इसलिए इस बार हर दिन से निकलनी हुई मनोकामना जरूर पूर्ण होगी।

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