अकेले लखनऊ में होता 200 करोड़ रुपए का कारोबार
लखनऊ : Hijab controversy latest news – बुर्का और हिजाब को लेकर पूरे देश में एक बहस चल रही है। स्कूलों से लेकर कई जगहों पर इस पर पाबंदी की बात चल रही है। राजनीतिक दल अपने अपने तरीके से इसको भुनाने में लगे हैं। लेकिन कभी मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग में इस्तेमाल होने वाला बुर्का समय के साथ और बढ़ती डिमांड के साथ आज उच्च वर्ग पसंदीदा हो गया है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुर्का मौजूदा समय करीब हर साल ₹200 करोड़ से ज्यादा का कारोबार है। कारोबारियों का कहना है कि इस में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बिजनेस बाइट की टीम ने जो पिछले 5 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह पाया कि कारोबार बढ़ने के साथ-साथ इस में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। लखनऊ के अमीनाबाद चौक लक्खा समेत कई इलाकों में मुर्गा कारोबारी पूरे दिन में 10,000 से लेकर ₹50000 तक का कारोबार करते हैं। लखनऊ शहर में ही करीब 5 से 6 लाख मुस्लिम महिलाएं इस कारोबार को आगे बढ़ा रही है।
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शादियों के सीजन में सबसे ज्यादा डिमांड
बुर्के की सबसे ज्यादा डिमांड शादियों के सीजन में होने लगी है। अमीनाबाद के कारोबारी मोहम्मद यामीन बताते हैं कि हर साल करीब 10 से 20 % का कारोबार बढ़ता है। उन्होंने बताया कि आम दिनों में जहां 15 से 20 बुर्का बिकता है वहीं सहायक के दिनों में यह बिक्री 50 तक पहुंच जाती है। बाजार में ₹200 से लेकर ₹10000 तक के बुर्के मौजूद है।
अरब कंट्री और दुबई से आया फैशन का ट्रेंड
कारोबारियों ने बताया कि पिछले दो दशक में कारोबार तेजी से बढ़ा है। लखनऊ से दुबई और अन्य अरब देशों के लिए डायरेक्ट फ्लाइट होने के बाद वहां जाना आसान हो गया है। वहां से लोग डिजाइन वाले बुर्का लाते हैं। उसके के बाद अपने टेलर से बोल के पैसा ही पीस तैयार करते हैं। कुछ सैंपल खरीदते हैं और फिर उसी को बनाना शुरू करते हैं। इससे लागत भी कम हो जाती है। लागम कम होने से बिक्री बढ़ने लगती है।
गरीब से अमीर की पसंद बनता बुर्का
कारोबारियों ने बताया कि पहले बुर्का गरीब और मध्यम वर्ग परिवार की महिलाएं पहनती थी। लेकिन इसमें फैशन और डिजाइन आने के बाद रसूखदार परिवारों में भी डिमांड बढ़ी। लखनऊ के कारोबारी मोहम्मद नदीम बताते हैं कि बुर्का एक तरीके से समानता का प्रतीक हुआ करता था लेकिन इसमें डिजाइनर फैशन आने के बाद भी यहां भी रसूल का अंतर करना आसान हो गया है। ऐसे में उच्च वर्ग भी इसकी तरफ खिंचा जाता है। कारोबारियों का अनुमान है कि लखनऊ में हर साल करीब 200 करोड़ रुपए से ज्यादा का रिटेलर होलसेल का काम है।
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पूरे प्रदेश में होती है सप्लाई
लखनऊ में तैयार बुर्का और हिजाब की सप्लाई पूरे प्रदेश में होती है। यहां घरों में दर्जी का काम करने वाली महिलाएं भी इस कारोबार से जुड़ी हैं। यहां से संबल, कन्नौज, बनारस, आजमगढ़, बिजनौर, अकबरपुर, मुबारकपुर, मऊ, बलिया, गाजीपुर समेत पूरे प्रदेश में माल जाता है। इसमें ज्यादातर सप्लाई डिजाइनर बुर्के की है। सिंपल वाला लोकल स्तर पर तैयार हो जाता है। शहर में 200 छोटी बड़ी दुकानें है। इसके माध्यम से करीब 20 से 25 लाख रुपए प्रतिदिन का औसत कारोबार होता है। महीने में यह कारोबार छह से सात करोड़ तक पहुंच जाता है। साल में 80 करोड़ रुपए तक रिटेल का कारोबार है। होल सेल की करीब 25 दुकानें है। इससे 120 करोड़ रुपए साल का काम होता है। ऐसे में लखनऊ और आस- पास के जिलों से यह कारोबार करीब 200 करोड़ रुपए साल का है।

