देहरादून। लाइफ स्टाइल में बदलाव के बाद से शहरी क्षेत्रों में शिशुओं को ब्रेस्ट फीडिंग (स्तनपान) कराने का अनुपात में काफी कमी आई है। यह चिंता का विषय है। जन्म से लेकर दो साल तक बच्चे को मां का दूध बहुत जरूरी है। बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए मां का दूध सबसे बढ़िया न्यूट्रीशियन है।
इसके लिए महिलाओं को बच्चे की सेहत के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। यूनिसेफ का बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए टीकाकरण, ब्रेस्ट फीडिंग,पोषण को बढ़ावा देने पर फोकस है। देहरादून में क्रिटिकल अप्रैजल स्किल (सीएएस) कार्यशाला के समापन पर सोनिया सरकार ने कहा कि स्वास्थ्य से संबंधित सही जानकारी समाज व समुदाय तक पहुंचाने के लिए वर्ष 2014 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सहयोग से सीएएस (जरूरी जांच परख) प्रोग्राम डिजाइन किया गया। इसका मकसद स्वास्थ्य से संबंधित भ्रांतियां व अफवाहों को रोकना था।
सीएएस के तहत 10 बिंदुओं पर रेटिंग टूल तैयार किया गया। जिससे स्वास्थ्य संबंधित खबरों को मानकों पर परखने की जरूरत है। इसी के तहत यूनिसेफ की ओर से तीन दिवसीय कार्यशाला में सीएएस की जानकारी दी गई। सोनिया सरकार का कहना है कि बच्चों के रूटीन और जीरो डोज के टीकाकरण पर यूनिसेफ का फोकस है।
केंद्र सरकार के साथ बच्चों के टीकाकरण में यूनिसेफ पार्टनरशिप में काम कर रही है। कोविड महामारी के दौरान देखा कि यदि वैक्सीन नहीं लिया तो कितनी गंभीर बीमारी हो सकती है। इसी प्रकार बच्चों को टीका नहीं लगाया तो रूबेला जैसी अन्य गंभीर बीमारी हो सकती है। कोविड काल में बच्चों के रूटीन टीकाकरण में कमी आई थी। इसके लिए केंद्र सरकार ने इंद्र धनुष कार्यक्रम चलाया। जिसके बाद टीकाकरण में सुधार आया। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के टीकाकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए वहां की भाषा में नुक्कड़ नाटक व अन्य कार्यक्रम हो रहे हैं।

