योगी सरकार की लीपा पोती से मामला बिगड़ता जा रहा है
उबैद उल्लाह नासिर

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के एक छोटे से गाँव में एक युवती के साथ हुई दरिंदगी ने हमारे सामने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम एक सभी समाज का हिस्सा हैं क्या हमारी नज़र में एक महिला केवल एक जिस्म है एक भोग की वस्तु है Iआज जब दुनिया के हर देश में महिलायें मर्दों के साथ कन्धा से कंधा मिला कर अपने देश और अपने समाज की सेवा कर रही हैं हम ऐसा माहौल क्यों पैदा कर रहे हैं जहाँ महिलाएं मर्दों के साथ कंधा से कन्धा मिला कर काम करने देश और समाज की सेवा करने के बजाय घर से निकलने में ही खुद को असुरक्षित महसूस करें I जिस समाज में 90 वर्ष की पोपली बुढ़िया से लेकर 9 साल तक की मासूम कली मर्दों की हवस का शिकार बन जाती हो उसे सभ्य समाज तो कतई नहीं कहा जा सकता I इस मामले में सरकारों अदालतों और प्रशासन तंत्र की लापरवाही और गैर ज़िम्मेदारी की चाहे जितना निंदा की जाए उनकी गलतियों और कोताहियों की ओर चाहे जितना ध्यान आकर्षित किया जाए आवश्यकता है कि हम सब अपने गिरेबान में झांकें और सोचें की समाज इतना असभ्य इतना बिगड़ा हुआ कैसे हो गया है I हमारी बुनियादी गलती कहाँ है कानून अदालत प्रशासन मुजरिमों को सजा दिला सकता है लेकिन समाज की सोच बदले बगैर इस तरह के शर्मनाक कांडों को रोकना बहुत मुश्किल होगा I
देहली में हुए निर्भया कांड के बाद पूरे देश में जो सजगता निर्भया के प्रति हमदर्दी और मुजरिमों के प्रति नफरत का जो उबाल आया था उस से लगता था की इस उबाल के बाद समाज के सोच में कुछ बदलाव ज़रूर आएगा और बेटियाँ किसी हद तक महफूज़ हो जायेंगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ I इस कांड के बाद जस्टिस वर्मा कमिटी के सुझावों पर अमल करते हुए तत्कालीन मनमोहन सरकर ने बलात्कार के सिलसिले में नया कानून बनाया सख्त यहाँ तक की फांसी पर लटकाने तक की सजा का प्रावधान किया गया बलात्कार की परिभाषा भी बदली गयी चार पांच साल के मुक़दमें के बाद निर्भया के मुजरिमों को फांसी पर लटका भी दिया गया मगर समस्या जस की तस बनी हुई है जिसका नवीनतम उदाहरण हाथरस की शर्मनाक और अफसोसनाक घटना है I
लेकिन हाथरस की घटना का एक ओर शर्मनाक और अफसोसनाक पहलू है और वह है इतना भयावह काण्ड हो जाने के बाद जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार द्वारा उसे वह महत्व न देना जो निर्भया काण्ड में मनमोहन सरकार ने दिखाई थी हाथरस काण्ड में प्रारम्भ से ही जिला प्रशासन का रवय्या अभियुक्तों को बचाने और इस केस को कमज़ोर करने की कोशिश वाला रहा है I हाथरस की इस युवती का 14 सितम्बर को बलात्कार और बुरी तरह मारे पीटे जाने यहाँ तक की उसकी रीढ़ की हड्डी टूट जाने तक की घटना होती है FIR तो लिख ली जाती है लेकिन उस में बलात्कार की धारा नहीं लगाईं जाती जबकि युवती खुद कह रही थी की उसके साथ बलात्कार हुआ है लगभग 10 दिन बाद मीडिया और विपक्ष के दबाव में बलात्कार की धरा जोड़ी जाती है लेकिन इतना लंबा समय बेत जाने के बाद उसकी मेडिकल जांच न होने के कारण बलात्कार के सुबूत करीब करीब समाप्त हो जाते हैं I फिर उस युवती के इलाज में घोर लापरवाही बरती जाती है ऐसा लगता था की जिला प्रशासन खुद चाहता था की यह युवती मर जाए उसे पहले जिला अस्पताल भेजा गया प्झिर अलीगढ के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज भेजा गया और वहां से देहली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ उस ने आखिरी सांस ली I अगर जिला प्रशासन इतनी बुरी तरह ज़ख़्मी बलात्कार का शिकार रीढ़ की हड्डी टूटी और जीब कटी युवती को सीधे देहली के आल इंडिया इंस्टिट्यूट में भर्ती करा देता तो शायद उसकी जाँ बचाई जा सकती थी I आपको याद होगा की निर्भया को पहले आल इंडिया इंस्टिट्यूट में ही भर्ती कराया गया था और जब वहां उसकी हालत नहीं सुधरी तो उसे एयर एम्बुलेंस से सिंगापोर भेजा गया था निर्भया की जाँ बचाने की भरपूर कोशिश की गयी थी जबकि हाथरस की युवती की जान लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी गयी थी भले ही प्रशासन की जाँ लेने की मंशा न रही हो लेकिन उसके इलाज में जो घोर लापरवाही की गयी उसे नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता और ऐसे हालात में यह इलज़ाम लगाना नाजायज़ भी नहीं होगा Iयही नहीं उस युवती के माता पिता भाइयों और अप्रिवार के अन्य सदस्यों को उसकी डोली सजाने से तो वंचित ही आकर दिया गया उसकी अर्थी भी सजाने की इजाज़त नहीं दी गयी और देर रात के अँधेरे में परिवार के कुछ ससदस्यों को साथ ले कर पेट्रोल डाल कर उसकी लाश हही जला दी गयी ऐसी क्रूरता की मिसाल मिलना मुश्किल है I याद कीजिये की न्रिभय की लाश जब जनवरी की कड़कड़ाती सर्द रात में देहली पहुंची थी तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और UPA की चेयरपर्सन सोनिया गांधी उसे रिसीव करने के लिए हवाई अड्डे पर मौजूद थे यहाँ हमारे प्रधान मंत्री को उस युवती से हमदर्दी जताने और पीड़ित परिवार से संतावना के दो बोल बोलने की भी तौफीक नहीं हुई मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने दानवीर कर्ण को पछाड़ते हुए मृतिका के परिवार वालों को 25 लाख की सहायता तो ज़रुर की लेकिन वहां जा कर पीडित परिवार को संतावना देने का कष्ट उन्हों ने भी नहीं किया उलटे उसके पिता से यह ज़रुरु लिखव लिया की वह सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट हैं यह तहरीर कैसे ली गयी होगी यह हम आप सब जानते समझते हैं लिखने की आवश्यकता नहीं I
इस काण्ड के बाद जब जिला प्रशासन की घोर लापरवाही और सरकार की लीपा पोती सामने आई तो मीडिया और विपक्ष का इस ओर ध्यान जाना बिलकुल कुदरती बात थी लेकिन जिला प्रशासन और और राज्य सरकार ने हाथरस को छावनी में बदलकर मीडिया और विपक्ष के बड़े नेताओं को वहां पहुँचने से रोकने की भरसक कोशिश की यहाँ तक की महिला पत्रकारों को भी वहां जाने से रोकने के लिए पुलिस और प्र्शासनिक अफसरों अभद्र व्योहार किया I कांग्रेस के नेता राहुल गांधी प्रियंका गांधी और उनेक साथ गए अन्य नेताओं को पहले दिन बलपूर्वक वहां जाने से रोका गया यहाँ तक की जब राहुल गांधी ने अफसरों से कहा की वह अकेले ही हाथरस जाने को टायर हैं उन्हें अकेले जाने दिया जाये उस पर भी प्रशासन राज़ी नहीं हुआ उसने बल का प्रयोग का जिससे राहुल गाँधी गिर पड़े और उनकी कोहनी चोटिल हो गयी प्रियंका गाँधी से साथ भी अभद्रता की गयी और देहलि महिला कांग्रेस की अध्यक्षा के साथ तो इतनी शर्नाक बदतमीज़ी हुई कि उन्हें अपने दुपट्टे से अपना शरीर छुपाना पडा था I दुसरे दिन फिर राहुल गाँधी प्रियानक गाँधी और अन्य कांग्रेसी नेता पहुंचे उस दिन कुछ नेताओं के साथ इन दोनों को युवती के घर जाने और पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति दी गयी लेकिन तृणमूल कांग्रेस के सांसदों को लाठी का निशाना बनाया गया और उन्हें वहां नहीं जाने दिया गया यही सुलूक राष्ट्रिय लोकदल के नेता जयंत चौधरी के साथ किया उनपर और उनके साथियों पर तो ऐसे लाठियां बरसाई गयी की अगर कार्यकर्त्ता जयंत को अपने घेरे में न ले लेते तो शायद उनकी हत्या ही हो जाती I
अभी भी लगभग एक महीना होने को है लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार और हाथरस जिला प्रशासन द्वारा मामले की लिपा पोती का क्रम जारी है कहा गया था की CBI की जांच होगी लेकिन उसका नोटीफिकेशन आज तक जारी नहीं किया गया उलटे SIT को दी गयी समय सीमा 10 दिन के लिए और बढ़ा दी गयी है जिससे साफ़ है की परेश सरकार इस काण्ड की सीबीआई जाँच कराने में दिलचस्पी नहीं रखती इस जांच का एलान महज़ ध्यान हटाने के लिए किया गया था I उत्तार प्रदेश सरकार इस मामले की लिपा पोती क्यों कर रही है यह बात किसी के भी समझ में नहीं आ रही ?

