सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह की जयंती आज यानि 29 दिसंबर को मनाई जाती है। सिख धर्म मेंगुरु गोविंद सिंह का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। वे सिख धर्म के 9वें गुरु तेगबहादुर के पुत्र और अंतिम गुरु थे। धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले गुरु गोविंद सिंह ने दूसरों के जीवन में प्रकाश लाने और उनका कल्याण करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसलिए वीर बहादुर गुरु गोविंद सिंह का जन्मोत्सव हर साल पौष महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है।
गुरु गोविंद सिंह से जुड़ी अहम बातें:
सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह का जन्म 22 दिसंबर, 1666 को पटना साहिब में हुआ था। लेकिन तिथि के अनुसार पौष शुक्ल सप्तमी को उनका जन्म हुआ था। इस वजह से उनकी जयंती दिसंबर या जनवरी के शुरुआत में होती है। उनकी जयंती को गुरु गोबिंद सिंह प्रकाश पर्व भी कहा जाता हैं। इस अवसर पर सिखों द्वारा गुरुद्वारों में भजन, अरदास, कीर्तन, लंगर आदि का आयोजन किया जाता है। बता दें कि पिता तेग बहादुर के बलिदान के बाद गुरु गोविंद सिंह ने मात्र 09 वर्ष की अल्प आयु में गुरु की गद्दी को संभाला था। इस तरह से वो सिखों के 10वें गुरु बन गए। वहीं गुरु गद्दी पर आसीन होने के बाद उन्होंने 1699 में बैसाखी के अवसर पर खालसा पंथ की नींव रखी थी। इस पंथ का मुख्य उद्देश्य धर्म रक्षा के साथ साथ परोपकार करना था। इसके लिए उन्होंने खालसा वाणी “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह” दी। आज भी यह वाणी लोगों में उत्साह भरने का काम करती है।
गुरु गोविंद सिंह त्याग और बलिदान के प्रतीक:
बता दें कि गुरु गोविंद सिंह त्याग और बलिदान के सच्चे प्रतीक थे। उनका पूरा परिवार मुगलों से युद्ध में शहीद हो गया। गुरु गोविंद सिंह लोगों को अपने आत्मसम्मान की रक्षा साहस के साथ करने को कहते थे। वे समाज में आपसी भाईचारा को बढ़ावा देने के साथ साथ भेदभाव और कुरीतियों को दूर करने के लिए काम करते थे।

