- मेरठ जिले के दो बड़े सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर्स की कमी
- अन्य सुविधाओं के लिए भी मरीज हलकान
मेरठ। कोरोनावायरस संक्रमण की दो लहर झेल चुके देश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी लचर स्थिति में है तीसरी लहर की आशंका के बीच सरकारी अस्पताल जहां डॉक्टर्स की भारी कमी झेल रहे हैं वही आए दिन अन्य सुविधाओं के लिए भी मरीजों को हलकान होना पड़ रहा है उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में भी स्थितियां कुछ ऐसी ही है यहां के दो बड़े सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर्स का भारी टोटा है वही दवाइयों की कमी और अन्य सुविधाएं भी मरीजों को नहीं मिल पा रही है
कैसे बन पाएगा पीजीआई
मेरठ के लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज में पीजीआई जैसी सुविधाएं देने के लिए हाईकोर्ट भी हिदायत दे चुका है लेकिन हायर सेंटर कहलाने वाले इस अस्पताल में बेसिक सुविधाओं का भी अभाव है। मरीजों के लिए ना दवाई है ना डॉक्टर्स स्थिति यह है कि रजिस्टर्ड 800 से अधिक दवाइयों में से मात्र 400 दवाइयां ही उपलब्ध हैं इनमें से भी अधिक तक दवाइयां खत्म है और मरीजों को बाहर से महंगी दरों पर दवाइयां खरीदनी पड़ती है हाल ही में आई कोरोना की दूसरी लहर ने अस्पताल के हालातों की पूरी पोल खोल कर रख दी थी।
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नहीं हुई डॉक्टर्स की भरपाई
मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज और प्यारे लाल शर्मा जिला चिकित्सालय को मंडल के बड़े अस्पतालों में गिना जाता है लेकिन इन अस्पतालों का हाल यह है कि 2 साल बीतने के बाद भी यहां डॉक्टर्स का जबरदस्त टोटा है। कोरोना महामारी ने फैलाई तबाही के बाद भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है एक आंकड़ों के अनुसार एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में करीब करीब 44 डॉक्टर की कमी है जबकि प्यारे लाल शर्मा जिला अस्पताल में 54 में से मात्र 28 डॉक्टर से उपलब्ध है ऐसे में जहां एक्सपर्ट संभावित तीसरी लहर को बेहद खतरनाक बता रहे हैं वही जिले के हालात इससे निपटने की तैयारियों को भी बखूबी बयान कर रहे हैं
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