कोरोना काल में गंगा नदी के किनारे दफनाये गये थे शव
जलस्तर बढ़ने पर होने वाले कटान से बह जाते हैं शव
प्रयागराज। गंगा नदी के किनारे दफनाये गये शव जलस्तर बढ़ने के बाद होने वाले कटान के कारण जल में बह जाते हैं। गंगा नदी में शव बहने से जहां दिवंगत व्यक्ति के शव की बेकद्री होती है वहीं यह राजनीतिक मुद्दा भी बन जाता है। प्रयागराज में गंगा नदी किनारे कोरोना काल में दफनाए गए शवों को गंगा नदी के कटान से बचाने के लिये शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। प्रयागराज की मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी की पहल पर गंगा नदी किनारे हो रहे कटान के कारण रेत से बाहर आ गये 25 शवों का अंतिम संस्कार कराया जा चुका है।
प्रयागराज में गंगा किनारे अनेक शवों को कोरोना काल के दौरान जमीन में दफनाया गया था। बारिश के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ नदी किनारे पर कटान होना शुरू हो गया है। ऐसे में रेत में दफनाये गये शव भी बाहर आने लगे हैं जिनके गंगा नदी में बहने की आशंका बढ़ गयी है। इससे एक ओर जहां गंगा का जल प्रदूषित होने का खतरा है वहीं गंगा नदी में बहते शव को लेकर सरकार पर भी सवाल खडे़ हो जाते हैं। ऐसे में प्रयागराज नगर निगम द्वारा कटान के कारण रेत से बाहर आ जाने शवों का हिन्दू रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कराया जा रहा है। शासन के निर्देश और नगर निगम प्रयागराज की मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी की पहल पर अब तक 25 शवों का अब तक अंतिम संस्कार कराया जा चुका है।
मेयर अभिलाषा गुप्ता का कहना है कि रेत में दफनाये गए शवों के गंगा में प्रवाहित होने से प्रदूषण हो सकता है। इसलिये ये हम सबकी जिम्मेदारी है कि इन शवों का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और रीति रिवाज के साथ किया जाये। मेयर ने सभी से इस नेक काम आगे आने और शवों के अंतिम संस्कार के काम में योगदान करने की अपील की है।

