- रिजर्व सीटों पर बीएसपी की तैयारी, मायावती ने की पदाधिकारियों के साथ बैठक
ऊषा सिंह
लखनऊ। रिजर्व सीटों के लिए बीएसपी ने नया फॉर्म्युला निकाला है। इन सीटों पर वह अतिपिछडुों के साथ जाट और मुसलमानों को जोड़ेगी। इसके लिए बीएसपी प्रमुख मायावती ने इन समाजों के सेक्टर और मंडल स्तर तक के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। माायावती ने कहा कि इन पदाधिकारियों को क्षेत्र में अपने-अपने समाज के लोगों को जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है।
ब्राह्मणों को गोलबंद करेंगे सतीश
प्रदेश में 84 सीटें एससी और दो सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। बीएसपी के लिए ये रिजर्व सीटें ही कमजोर कड़ी रही हैं। वजह यह है कि दलित बीएसपी का कोर वोटर है। रिजर्व सीटों पर सभी पार्टियों के इसी वर्ग के प्रत्याशी होते हैं। ऐसे में ये वोट बंट जाते हैं। यहां पर दूसरी जातियां अहम हो जाती हैं। पार्टी ने 2007 में रिजर्व सीटें सबसे ज्यादा जीती थीं। तब पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी। उसके बाद से इन सीटों पर प्रदर्शन खराब रहा है। यही वजह है कि मायावती इन सीटों पर ज्यादा जोर दे रही हैं। पिछले हफ्ते इन सीटों के मंडल अध्यक्षों को बुलाया था। मंगलवार को तीन समुदायों मुसलमान, जाट अतिपिछड़ा वर्ग के सेक्टर और मंडल स्तर तक के सभी पदाधिकारियों के साथ बैठक की। वहीं इन सीटों पर ब्राह्मणों को जोड़ने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को दी गई है।
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कांग्रेस ने लटकाई मंडल आयोग की रिपोर्ट
मायावती ने कहा कि यूपी सहित पूरे देश में अतिपिछड़ा वर्ग को जो सुविधाएं, अधिकार और सम्मान मिला उसमें बाबा साहब भीगराव अम्बेडकर का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने संविधान में इनके लिए विशेष प्रावधान किए।उसके बावजूद इतने साल तक देश में कांग्रेस की सरकार रही लेकिन अधिकार नहीं दिए गए। मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं की। वह भी बीएसपी के अथक प्रयास से वीपी सिंह के प्रधानमंत्री बनने के बाद लागू हुई।
मुसलमानों का किया जा रहा उत्पीड़न
बीएसपी प्रमुख ने कहा कि आरक्षण की सुविधा को केंद्र और राज्यों की सरकारें नए-नए कानून बनाकर और कोर्ट-कचहरी में उलझाकर प्रभावहीन बनाने की कोशिश कर रही हैं। यूपी में भी ऐसा ही हो रहा है। जाज जातीय जनगणना की मांग हो रही है। बीएसपी इसका पूरी तरह समर्थन करती है। इसको भी जातिगत मानसिकता के कारण नजरअंदाज किया जा रहा है। मुस्लिम समाज के लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। उनके अंदर दहशत पैदा की जा रही है। इससे बीजेपी का सौतेला रवैया नजर आता है। इस तरह जाट समाज की भी अपनी समस्याएं हैं। बीएसपी की सरकार बनने पर इन सभी वर्गों का पूरा खयाल रखा जाएगा।
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चंद्रशेखर से गठबंधन का सवाल ही नहीं
सपा का छोटे-छोटे दलों से गठबंधन करके पिछली बार बीजेपी की तरह सत्ता में आने के दावे पर उन्होंने कहा कि यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि किसमें कितना दम है। उन्होंने एक बार फिर साफ किया कि बीएसपी अकेले ही सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद के साथ गठबंधन के सवाल पर कहा कि सवाल ही नहीं पैदा होता। संसद से 12 सांसदों को निलंबित किए जाने पर कहा कि सरकार को इतना कड़ा रुख नहीं अपनाना चाहिए। बातचीत करके सुलह का रास्ता निकालना चाहिए।

