राजा बैठा सबकी क्लास ले रहा था।
अनूप मणि त्रिपाठी
‘अच्छा तुम बताओ ! ऐसे मौके पर तुम क्या करोगे!’ राजा ने एक टीवी चैनल वाले की ओर संकेत कर पूछा।
‘महाराज, जैसा कि आपने समझाया, जब अपने यहाँ प्याज महंगे होने लगे, तब हम पड़ोसी देश के महंगे होते टमाटर दिखाने लगेंगे।’ चैनल वाला बहुत खुशी से बोला। जैसे क्लास में किसी बच्चे को प्रश्न का उत्तर मालूम होता है, तो वह सबसे पहले हाथ खड़ा करता है। उत्तर देते वक्त कुछ ऐसे ही भाव थे उसके चहेरे पर।
पर राजा ने उसे कोई भाव नहीं दिया और न ही तो उसके चेहरे पर कोई भाव आये। उसने तुरन्त ही अपना दूसरा प्रश्न उछाला,’रोजगार को लेकर लड़का लोग आंदोलन करने लगे तब क्या कीजियेगा!’
इस प्रश्न को एक दूसरे चैनल वाले ने लपका जो समाचार पढ़ते हुये अपने साथ तलवार-बन्दूक रखता था।
‘तो हम तुरंत ही देशद्रोही घोषित कर देंगे! बाकी आपका आई टी सेल तो मसाला उपलब्ध ही करा देगा न महाराज!’
उसके उत्तर देने के बाद एक तीसरे चैनल वाला बोला,जो बहुत विनम्रता से बोलता था,’महाराज मैं भी यही करूँगा, जो अभी हमारे प्रतिस्पर्धी मित्र ने कहा। मगर साथ में मैं जिस राष्ट्र की बेरोजगारी दर विश्व में सबसे अधिक होगी, उसके बारे में दिखाने लगूँगा और लगे हाथों शत्रु राष्ट्र की भी आर्थिक हालात पर तरह-तरह से ग्राफिक बनाकर और खूब भयंकर-भयंकर हैडिंग बना कर खबर चलवा दूंगा!’
‘हैडिंग कैसी होगी! जरा हमारे दूसरे मित्रों के लिये उदाहारण भी हो जाये!’ राजा का मंत्री बोला।
‘अब भीख मांगेगा पड़ोसी!!! कटोरा लेकर दर-दर घूमता पड़ोसी देश!!! उड़ गयी झोपड़ी, घूम गयी खोपड़ी!!!’ अति विनम्र चैनल वाले ने यह बात बहुत विनम्रता से की। इसकी प्रस्तुति पर कक्ष में उपस्थित सभी लोगों ने तालियाँ बजायीं,सिवाय राजा के।
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‘कहीं कोई हड़ताल, तालाबंदी हुयी तब!’ राजा ने गम्भीरता से पूछा।
‘तो हम तुरंत ही देशद्रोही घोषित कर देंगे! बाकी आपका आई टी सेल तो मसाला उपलब्ध ही करा देगा न महाराज!’ स्टूडियो में तलवार-बन्दूक रख कर समाचार दिखाने वाला बोला।
‘चुप हो जाओ भाई! आपका तो जब देखो तब सजीव प्रसारण चालू हो जाता है!’ मंत्री ने टोका।
कक्ष में कुछ देर के लिए शांति छा गयी।
‘हमें जनता का भी तो सोचना है! हर बार एक जैसी ही खबर दिखाओगे तो उसे अपच नहीं हो जाएगी! क्यों!’ मंत्री ने सभी को बहुत प्यार से समझाया।
‘महाराज! हम अंतरिक्ष की …नहीं तो फिर इतिहास की…या फिर सैनिकों की… आई मीन टू से…राष्ट्रभक्ति…बलिदान वगैरह की फीचर या कोई खबर चला देंगे! कई ऑप्शन है हमारे पास।’ इस बार एक चैनल वाली बोली।
कक्ष एक फिर तालियों से गूँज गया। राजा को छोड़कर सबने तालियाँ बजायीं।
‘ऐसे सिचवेशन में आप चाहे तो युद्ध का कोई वीडियो गेम भी चला सकती हैं!’ मंत्री अपने अनुभव का शानदार प्रदर्शन करते हुए बोला।
‘स्योर सर! दिस इज फैंटास्टिक आइडिया!!!’ चैनल वाली खुशी से उछलते हुए बोली।
‘और यूनिक भी!!!’ पीछे से किसी और चैनल वाले की आवाज आयी। यह वही श्रीमान थे, जो स्वयं को प्रभावी और समाचार को प्रमाणिक बनाने हेतु
अपने स्टूडियो में कभी तलवार तो कभी बन्दूक के साथ उपस्थित होते थे।
राजा और मंत्री एक दूसरे को देखकर मुस्कुराए।
‘अगर हमारे विरोधी …’ राजा ने आधा वाक्य ही बोला, मगर वहाँ पर उपस्थित चैनल वालों को इसका पूरा का पूरा अर्थ समझ में आ गया ।
सब एक स्वर में बोले,’ऐसी निगेटिव खबर दिखाना ही क्यों!’
मगर एक चैनल वाला खामोश रहा। राजा ने उसे बहुत ध्यान से देखा।
‘तुम! और तुम क्या करोगे!’ राजा ने कड़क होकर उससे पूछा।
‘जब आपके विरोधी सवाल उठाएंगे तो, महाराज मैं दन से एक नया सर्वे चला दूँगा!’ चैनल वाला बोला।
राजा और मंत्री ने एक दूसरे को देखा।
‘कैसा सर्वे बे!’ मंत्री ने पूछा।
‘महाराज की पॉपुलरटी का…और क्या!’
उसके यह कहते ही कक्ष में जोरदार तालियाँ बजने लगीं। इस बार राजा ने भी बजायीं।
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अब जा करराजा की क्लास पूरी हुयी। राजा सन्तुष्ट हुआ। मंत्री आश्वस्त हुआ। चैनल वाले आभारी और पहले से कुछ ज्यादा ‘भारी’ होकर चले गए।
उसी दिन रात को राजा ने अचानक मंत्री को अपने शयनकक्ष में याद किया।
‘आप ने याद किया महाराज!’ मंत्री को थोड़ी टेंशन हुयी।
‘हाँ, नींद नहीं आ रही!’ राजा भारी स्वर में बोला।
‘सब कुशल महाराजा!’ कहीं भाषण न लिखवाने लगे! मंत्री ने मन ही मन सोचा।
‘आज की क्लास कैसी रही!’ राजा ने गम्भीर स्वर में पूछा।
‘बहुत शानदार महाराज!’ मंत्री ने झट से उत्तर दिया।
‘फिर क्या सोचते हो!’ राजा ने मंत्री को ध्यानपूर्वक देखा।
‘महाराज आपकी सत्ता बरसों बरस निर्बाधरूप से चलेगी!’ मंत्री जोश में बोला।
‘कहीं तुम्हारा यह अतिआत्मविश्वास तो नहीं!’ राजा शून्य में देखते हुए बोला।
‘नहीं महाराज! आप शायद भूल रहे हैं हमारे पास टेलीविजन है टेलीविजन! सैकडों बुद्धिजीवी,लेखक मिलकर सालों-साल जनता में जो जागृति फैलाते हैं, टीवी का बस एक घण्टे का प्रोग्राम इनके किये कराए पर पानी फेर देता है। ‘ मंत्री ने बहुत घमंड से यह बात कही।
‘तुम्हारे इस बात से जी कुछ हल्का हुआ!’ राजा गहरी सांस छोड़ते हुए बोला।
‘महाराज! आप यह जान लें कि जब तक हमारे कब्जे में टेलीविजन रहेगा, तब तक देश का वही विजन होगा, जो हमारा रहेगा!’
‘मने कोई नहीं!’ यह कहकर राजा ठठाकर हँसा।
राजा के इस आप्रत्याशित रहस्योद्घाटन से मंत्री भी अपनी हँसी न रोक सका। सारे प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए वह भी जोर से हँस पड़ा।

