Form-G and Form-H : आमदनी पर टीडीएस कटने से बचाने के लिए भरे जाते हैं। इनकम टैक्स एक्ट के अनुसार टैक्सपेयर्स को खास तरह की इनकम पर टीडीएस (TDS) में छूट मिलती है।
खास तरह की Income पर TDS छूट
कुछ खास तरह के इनकम पर TDS में छूट मिलती है। इन छूट में ब्याज, डिविडेंड, रेंट और इंश्योरेंस कमीशन इत्यादी शामिल हैं। फॉर्म 15G और 15H में इसका खुलासा करना पड़ता है। अगर इनकम टैक्स (Income Tax) नहीं बनता है तो ये फॉर्म लिए नहीं हैं। इनकम टैक्स कानून के अनुसार टैक्सपेयर्स को कुछ खास तरह की आय पर टीडीएस(TDS) में छूट मिलती है। इनमें डिविडेंड, ब्याज, रेंट और इंश्योरेंस का कमीशन शामिल है। फॉर्म 15G और 15H में इस आय का खुलासा करना पड़ता है।
जिन लोगों पर इनकम टैक्स नहीं बनता वो पैन के साथ ये दोनों फॉर्म बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा कर सकते हैं। दोनों फॉर्म आय पर टीडीएस कटने से बचाने के लिए भरने होते हैं। अगर कुल सलाना आय पर टैक्स की देनदारी नहीं बनती तो दोनों में कोई एक फॉर्म भरना जरूरी है। इसके बाद टीडीएस नहीं काटा जाएगा।
15जी उन लोगों के लिए है जो सीनियर या सुपर सीनियर नागरिक नहीं है। इस फॉर्म को बैंक में जमा करने से एफडीआर और उससे अर्जित ब्याज पर टीडीएस कटने से बचा जा सकता है। 15एच फॉर्म सीनियर और सुपर सीनियर सिटीजन के लिए है। दोनों फार्म को ऑफलाइन और ऑनलाइन तरीकों से भरा जा सकता है।
15G कौन भर सकता है?
इस फार्म को कंपनियां नहीं भर सकतीं, सिर्फ व्यक्तियों के लिए है। इसके लिए भारतीय नागरिक होना चाहिए। उम्र 60 साल के कम होनी चाहिए। इनकम पर टैक्स नहीं होना चाहिए। सालाना आय ढाई लाख रुपए से कम होनी चाहिए।
15H किसके लिए है?
भारतीय नागरिक होना चाहिए। उम्र 60 साल या उससे अधिक होनी चाहिए। आय पर टैक्स देनदारी नहीं होनी चाहिए। सालाना आय ढाई लाख रुपए या तय सीमा से ऊपर है तो ये फॉर्म नहीं भरने चाहिए। इसकी वजह है कि इन फार्म के साथ पैन नंबर दिया जाना जरूरी है। इससे बाद में परेशानी हो सकती है। पकड़े जाने पर ऊपर टैक्स चोरी के आरोप लग सकते हैं।

