भारत के चढ़ते शेयर बाजार के कारण विदेशी निवेशक लगातार निवेश घटा रहे हैं। सतर्क रुख अपनाते हुए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अगस्त में घरेलू शेयर बाजार में सिर्फ 7,320 करोड़ रुपये का निवेश किया। शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन और येन कैरी ट्रेड यानी बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दर बढ़ाने के बाद कम ब्याज दर वाले देश से उधार लेकर दूसरे देश की संपत्तियों में निवेश करने की परंपरा खत्म होने के बीच उन्होंने सतर्क रुख अपनाया है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने जुलाई में 32,365 करोड़ रुपये और जून के महीने के महीने में 26,565 करोड़ रुपये का भारी भरकम निवेश किया था।
शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक सितंबर में एफपीआई की घरेलू बाजार में दिलचस्पी बनी रहने की संभावना है। हालांकि, पूंजी प्रवाह घरेलू राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक संकेतकों, वैश्विक ब्याज दर की स्थिति, बाजार मूल्यांकन, क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और बॉन्ड बाजार के आकर्षण से निर्देशित होने की उम्मीद है। पिछले दो महीनों के मुकाबले एफपीआई की दिलचस्पी में कमी का मूल कारण भारतीय बाजार में ऊंचा मूल्यांकन है। निफ्टी वित्त वर्ष 2024-25 की अनुमानित आय के 20 गुना से अधिक पर कारोबार कर रहा है। इसके साथ ही भारत अब दुनिया का सबसे महंगा बाजार बन गया है।
रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि एफपीआई के पास काफी सस्ते बाजारों में निवेश करने के अवसर हैं और यही वजह है कि उनकी प्राथमिकता भारत के अलावा अन्य बाजार हैं। उन्होंने कहा कि 24 अगस्त को येन कैरी ट्रेड की समाप्ति का FPI के व्यवहार पर काफी असर पड़ा जिसकी वजह से घरेलू इक्विटी में भारी बिकवाली हुई।
इस बीच, अगस्त में एफपीआई ने बॉन्ड बाजार में 17,960 करोड़ रुपये का निवेश किया। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में शामिल होना, आकर्षक ब्याज दरें, स्थिर आर्थिक वृद्धि और अनुकूल दीर्घकालिक दृष्टिकोण एफपीआई को बॉन्ड में निवेश करने के लिए प्रेरित करने वाले प्रमुख कारक रहे हैं। रणनीतिकार विजयकुमार ने कहा कि इसके अलावा एफपीआई मुख्य रूप से बॉन्ड बाजार में खरीदारी कर रहे हैं क्योंकि इस साल भारतीय रुपया स्थिर रहा है और यह स्थिरता जारी रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही 2024 में अब तक इक्विटी में एफपीआई का निवेश 42,885 करोड़ रुपये और बॉन्ड बाजार में 1.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

