By-अमित बिश्नोई
मेरठ। UP Assembly Election 2022 (उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022) के चार चरणों के चुनाव का मतदान हो गया है। अब कल यानी रविवार को पांचवें चरण (Fifth Phase) के लिए वोट डाले जाएंगे। प्रदेश में चुनौतियों के लिहाज से यह पहला ऐसा चुनाव है। जिसमें प्रत्येक चरण में राजनैतिक दलों को नई चुनौतियों से दो—चार होना पड़ा है। पांचवें चरण ((Fifth Phase) में अब एक बार फिर से राजनैतिक दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। इस पांचवें चरण के चुनाव में जिन जिलों में मतदान होगा उनमें तीन प्रमुख धार्मिक स्थल (three major religious places)वाले जिले भी शामिल हैं। इनमें राम की जन्मभूमि अयोध्या (Ramjanam bhoomi Ayodhya) उनकी कर्मभूमि चित्रकूट और तीन प्रमुख नदियों का संगम प्रयागराज ( Sangam Prayagraj ) शामिल हैं। इसके अलावा श्रावस्ती जिले में भी इस पांचवें चरण का मतदान होगा। श्रावस्ती गौतमबुद्ध की तपोस्थली कही जाती है। पांचवे चरण में नौ जिलों की 59 सीटों पर मतदान होगा।
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पहला चक्रव्यूह
पहले चरण से पांचवे चरण ( First Phase to Fifth Phase ) तक आते हुए नेताओं के तीखे बयान चरम पर पहुंचे हैं। बयानों के बीच मुख्य मुद्दे गायब हैं। गर्मी और चर्बी वाले बयान से होता चुनाव राजनैतिक दलों के चुनाव चिन्ह, आतंकवादी तक पहुंच गया है। पांचवें चरण में समस्याओं पर बात हो रही है। बयानवीरों ने चक्रव्यूह को तोडऩे के लिए समस्या समाधान की बात शुरू की है।
दूसरा चक्रव्यूह
भाजपा ने वोटों के ध्रुवीकरण की पूरी कोशिश की लेकिन चौथे चरण तक यह काम नहीं आया। न तो हिंदू बनाम मुसलमान चला और न हिंदुओं के पलायन का मुद्दा सजीव हो सका। पांचवें चरण के इस दूसरे चक्रव्यूह में किसान हैं। गैया चर गयी वोट… जैसे नारे फिजाओं में तैर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह कहना पड़ा कि वह 10 मार्च के बाद छुट्टा जानवरों से जुड़ी समस्या के समाधान पर पहल करेंगे। भाजपा को किसानों को मनाना काफी टेढ़ी खीर साबित हो ही है।
तीसरा चक्रव्यूह
इस चरण में बेरोजगारी तीसरा चक्रव्यूह बनी हुई है। कोई भी जिला हो सभी नौ जिलों में रोजगार और आवारा पशु प्रमुख रूप से छाया हुआ है। भाजपा जहां राममंदिर के साथ सुशासन का राग अलाप रही है। वही सपा किसानों और बेरोजगारों के मुद्दे को हवा देकर अवध फतह करने की कोशिश में है।
चौथा चक्रव्यूह
चौथा चक्रव्यूह इस पांचवें चरण के चुनाव में जातीय गणित का है। जिसने जातीय गणित के इस फार्मूले को निकाल लिया वहीं इसको फतह कर सकेगा। इस चरण में सभी 9 जिलों की 59 सीटों पर पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियां के कई समूह हैं। भाजपा और सपा कें अन्य दलों ने इस चरण में अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारने में काफी सावधानी बरती है। इन दलों को इन 59 सीटों पर राजभर, कुर्मी-पटेल, गड़रियों, निषादों के मतदाताओं को साधना कोई हंसी खेल नहीं है। इस पांचवें चरण के चुनाव में 2017 के दौरान भाजपा ने 60 में से 50 सीटे जीती थी। इस बार इन जातियों को साधना काफी मुश्किल काम लग रहा है।
पांचवा चक्रव्यूट
यह वो चक्रव्यूह है जिसको पार करने के लिए सभी दलों ने जोर लगा दिया है। वह है युवाओं का वोट। इन 9 जिलों की 59 सीटों पर सर्वाधिक संख्या यूथ वोटरों की है। जिसको साधने के लिए भाजपा और सपा काफी पहले से काम कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस और आप भी युवाओं को लुभाने में पीछे नहीं है। इन 59 सीटों पर यूथ वोटर अभी तक चुप है। वह किस ओर जाएगा यह तो कल रविवार को तय होगा। लेकिन जिधर जाएगा उस दल की किस्मत का दरवाजा ही खोल देगा।

