Relationship:- आज हम ऐसे समय मे जी रहे हैं जहाँ लोग प्रेम को अत्यधिक महत्व देते है और वह प्रेम का वास्तविक रूप खोजने का निरंतर प्रयास करते हैं पर क्या वास्तव में प्रेम का कोई मतलब है क्या कोई और आपके लिये आपसे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है अगर हां तो यह प्रेम की एक अनुभूति है जो दुखदायी भी हो सकती है, क्योंकि इससे आपके अस्तित्व को खतरा है। जैसे ही आप किसी से यह कहते हैं, की मैं आपसे प्रेम करता हूँ आप अपना अस्तित्व और अपनी पहचान उसको समर्पित करने लगते हैं और फिर धीरे धीरे आप अपना सबकुछ खो देते हैं।
प्रेम बुरा नहीं है पर प्रेम के वास्तविक रूप को न समझना बुरा है आजकल समय ऐसा है जब लोग प्रेम को नहीं समझते उनको लगता है वो खुद को समर्पित करके अपने प्रेम को पा लेंगें पर उनकी यह सोंच गलत है क्योंकि यह सोंच उनको उस दिशा में ले जाती है जहाँ वह अपने जीवन में जो भी करना चाहते हैं, वह नहीं कर पाते हैं । यह एक ऐसी स्थिति उत्पन्न करता है जो आपको अपने अंदर खींचता चला जाता है। यह एक मीठा जहर है, बेहद मीठा जहर जो आपको खुद को मिटा देने वाली स्थिति तक ले जा सकता है और शायद ले भी जाता है
पर वास्तव में देखें अगर आप खुद को नहीं मिटाते, तो आप कभी प्रेम को जान ही नहीं पाएंगे क्योंकि आपके अंदर का कोई न कोई हिस्सा मरना ही चाहिए यदि आपके अंदर का वह हिस्सा जो अभी तक सिर्फ आप था उसे वह मिटता है तो आप प्रेम को समझने की एक सीढ़ी चढ़ेंगे और अगर आप ऐसा करते हैं तो आप दर्द से दूर रहेंगे और अगर आप ऐसा नहीं होने देते, तो यह प्रेम नहीं है, व्यापार है जहां हर चीज नाप तोल की होगी ।
जब आप वास्तव में किसी से प्रेम करते हैं तो आप अपना व्यक्तित्व, अपनी पसंद-नापसंद, अपना सब कुछ उसके प्रति समर्पित करने के लिए उपस्थित रहते हैं और जब प्रेम नहीं होता, तो लोग कठोर हो जाते हैं। जैसे ही वे किसी से प्रेम करने लगते हैं, तो वे हर जरूरत के अनुसार खुद को ढालने के लिए तैयार हो जाते हैं प्रेम अपने आप में एक शानदार आध्यात्मिक प्रक्रिया है पर प्रेम में सिर्फ एक तरफा समर्पण सौदा है इसलिए प्रेम एक ऐसी अनुभूति है जो मानव व्यवहार को निरंतर बदलती है पर प्रेम में होने वाला बदलाव आपके अस्तित्व को नहीं खोता और जो बदलाव आपके अस्तित्व को ले जाये वो प्रेम नहीं होता ।

