अदालत में याचिका तो सड़क पर आंदोलन क्यों: सुप्रीम कोर्ट

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अदालत में याचिका तो सड़क पर आंदोलन क्यों: सुप्रीम कोर्ट

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा, लखीमपुर खीरी जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रही किसान महापंचायत को आज सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत देने की मांग वाली किसान महापंचायत की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया है कि जब यह मामला अदालत में चल रहा है तो किसान संगठन सड़कों पर प्रदर्शन कैसे कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब लखीमपुर खीरी जैसी घटनाएं हो जाती हैं तो फिर कोई जिम्मेदारी नहीं लेता। सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के आंदोलन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कानूनों के अमल पर रोक है तो विरोध किस बात का। वहीं किसानों द्वारा बंद किये गये रास्तों को खुलवाने की मांग को लेकर दर्ज याचिका पर सुनवाई करते हुए सुुप्रीम कोर्ट ने 43 किसान नेताओं और संगठनों को नोटिस भी जारी किया है।

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केंद्र सरकार द्वारा लाये गये कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों की ओर से आंदोलन किया जा रहा है। आंदोलन को और तेज करने के लिये किसान महापंचायत ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत मांगी थी। वहीं किसान महापंचायत ने कृषि कानूनों के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की हुई है।

राजस्थान हाईकोर्ट में दाखिल याचिका को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर होने के बाद याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया है कि एक ओर जहां किसान संगठनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है वहीं दूसरी ओर किसान महापंचायत सड़कों पर आंदोलन कर रही है। ऐसा कैसे हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोग या तो आंदोलन करें या अदालत से राहत मांगे। सुप्रीम कोर्ट अब इस बात पर भी विचार करेगा कि अदालत में लंबित मामलों पर कोई व्यक्ति या संगठन, आंदोलन या प्रदर्शन कर सकता है या नहीं? इस याचिका पर अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी।

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43 किसान नेताओं और संगठनों को नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका में जिसमें किसानों को सड़कों से हटवाने और बंद किये गये रास्ता खाली कराने की मांग की गई है पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने किसान नेताओं को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने किसान नेता राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव समेत 43 किसान नेताओं और संगठनों को जारी नोटिस में पूछा है कि क्यों ना उन्हें इस मामले में पक्षकार बनाया जाए।

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