- जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने कहा, अलोकतांत्रिक हैं तीनों कृषि कानून
- किसान विरोधी तीनों कानून को जल्द से जल्द रद किया जाये
मेरठ। किसान भारत की आत्मा है, इसे मत दुखाओ। किसान विरोधी जो तीन कानून अलोकतांत्रिक तरीके से बनाये है, उन्हें जल्दी से जल्दी रद्द किए जाए। सोमवार को मेरठ पहुंचे जलपुरूष राजेन्द्र सिंह ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि किसानों ने अपना शांतिमय स्वरूप, अहिंसात्मक रास्ता पकड़ा है। महात्मा गांधी ने इसी रास्ते पर देश को खड़ा करके अंग्रेजों को भगा दिया था।
भीकमपुरा (राजस्थान) से शुरू हुई किसान कानून साक्षरता यात्रा सोमवार को मेरठ पहुंची। गंगाजल बिरादरी के संयोजन में दिल्ली में आंदोलनरत किसानों का समर्थन कर रहे रेमन मैगसेसे अवार्डी, स्टाॅकहोम वाटर पुरस्कार विजेता जलपुरुष राजेन्द्र सिंह कमिश्नरी पार्क में पहुंची यात्रा में शामिल हुए।
सभा की शुरुआत किसान आंदोलन में अपने प्राण गंवाने वाले किसानो को श्रद्धांजली अर्पित कर की गई। इस दौरान पत्रकारों से वार्ता करते हुए जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार ने तीनों कृषि कानून अलोकतांत्रिक तरीके से बनाए हैं। किसानों की सीधी मांग है कि किसान विरोधी तीनों कानून को जल्द से जल्द रद किया जाये।
किसान आंदोलन में शामिल किसानों ने शांतिमय स्वरूप, अहिंसात्मक रास्ता चुना है। इसी मार्ग पर चलकर महात्मा गांधी ने देश सेे अंग्रेजों को भगा दिया था। राजेंद्र सिंह ने कहा कि एमएसपी दर लागू किया जाना चाहिये। केंद्र सरकार को सीधे तौर पर जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने कहा कि किसान भारत की आत्मा है, इसे मत दुखाओ।
गंगाजल बिरादरी के राष्ट्रीय संयोजक पूर्व मेजर हिमांशु ने कहा, यदि केंद्र सरकार कृषि बिलों को किसान हितैषी मानती है तो माननीय प्रधानमन्त्री 4-5 किसान जानकार आन्दोलनकारी नेताओ से इन बिलों पर खुली बहस कर लें। सरकार को चाहिये की दर से कम की खरीद को दंडनीय अपराध घोषित करें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को मामला सुलझाना चाहिये न कि देश में आग लगवानी चाहिये।

