depo 25 bonus 25 to 5x Daftar SBOBET

किसान बदनाम हुआ, नेताजी तेरे लिये

आर्टिकल/इंटरव्यूकिसान बदनाम हुआ, नेताजी तेरे लिये

Date:


किसान बदनाम हुआ, नेताजी तेरे लिये

बदनाम- निराश हुआ सिर्फ किसान, नुकसान में रहा सिर्फ किसान

सुनील शर्मा

ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई लालकिले तक पहुंच जाये औैर पुलिस की एक गोली भी न चले। यह कहना किसी किसान विरोधी दल या व्यक्ति का नहीं बल्कि खुद को किसानों का रहनुमा बताने वाले भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत का है जिनको शायद लगता है कि लालकिले पर चढ़ने वालों पर पुलिस को गोली चलानी चाहिये थी। राकेश टिकैत के कहने का यह भी मतलब निकल रहा है कि पिटती पुलिस ने किसानों पर गोली इसलिये नहीं चलाई क्योंकि यह किसान संगठन को बदनाम करने की साजिश थी। सवाल यह है कि यदि गोली चलती और किसान भाई मर जाते तो क्या राकेश टिकैत दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को सही बताते और किसान की मौत को किस तरह से लेते। क्या राकेश टिकैत भी यही चाहते थे कि पुलिस गोली चलाती और किसान मरते ताकि आंदोलन और तेज होता औैर किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे नेताओं की राजनीति और चमकती।

राजनीति व्यक्ति को कितना गिरा सकती है यह जानना है तो किसान नेताओें के बयानों को देख-सुन लिजिये। वह किसान नेता जिन्होेंने अपनी राजनीति को चमकाने के लिये आज किसान की छवि को धूमिल कर दिया है। वह किसान नेता जिन्होंने ने यह भी नहीं सोचा की दो महीने से जो किसान उनके वादों पर भरोसा कर सर्दी-बरसात को झेलता हुआ सड़क पर बैठा है आज उसका मन कितना दुखी होगा। लंबे समय तक चले आंदोलन में अपना सर्वस्व दांव पर लगाने वाला किसान आज निराश है तो उसका जिम्मेदार भी यह किसान नेता हैं। आज कोई किसान नेता दूसरे नेता को जिम्मेदार ठहरा कर आंदोलन से हट गया तो किसी से किसान संगठन ने ही पल्ला झाड़ लिया। इन सबकी नूरा कुश्ती में पिसा तो सिर्फ किसान ही न जिसकी समझ में यह नहीं आ रहा कि अब वह किस ओर जाये।

अब जरा देखिये भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के बयान को। बुधवार शाम को पत्रकारों से वार्ता करते हुए भी राकेश टिकैत को अपनी जिम्मेदारी का अहसास तक नहीं था और वह गणतंत्र दिवस पर हुए बवाल को नजरअंदाज कर ट्रैक्टर रैली को सफल बताते रहे। लेकिन आंदोलन को और उग्र करने की मंशा नाकाम होने की खीज उनकी जुबां पर आ गयी और उन्होंने लालकिला तक लोगों के पहुंच जाने को लेकर पुलिस-प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा दिया। राकेश टिकैत की निराशा इस हद तक थी कि उन्होंने कहा, कोई लाल किले पर पहुंच जाए और पुलिस की एक गोली भी न चले। यह किसान संगठन को बदनाम करने की साजिश थी।

राकेश टिकैत के बयान को सुनकर यह साफ लगता है कि कहीं न कहीं पुलिस के किसानों पर गोली न चलानेे और आंदोलन के और तेज न हो पाने का दर्द उनके मन में है। क्योंकि इतिहास गवाह है कि आंदोलन कुर्बानी मांगता है और वह कुर्बानी कभी नेता नहीं देते। कुर्बानी हमेशा देते हैं नेताओं पर भरोसा करने वाले लोग, उनको अपना मसीहा समझने वाले लोग। नेता तो उनकी मौत पर रोटियां सेकते हैं, उनको शहीद बताकर हंगामा करते हैं, आंदोलन करते हैं। मरने वाला मर जाता है और नेताजी और बड़े नेता बन जाते हैं। और शायद यही इस आंदोलन में भी होता यदि दिल्ली पुलिस इतनी पिटने, इतने उपद्रव को झेलने के बाद भी खुद को संयमित न रखती। यदि गोली चलती और किसान भाई मारे जाते तो आंदोलन का और तेज, और उग्र होना स्वाभाविक था। और अब गोली चलाने की मांग करने वाले गोली चलाने पर ही बवाल करते दिखते।

और शायद यही कारण भी है कि खुद को किसानों की अगुवाई करने वाले, उनका मसीहा साबित करने वाले राकेश टिकैत हंगामे और उपद्रव से दूर रहे। दिल्ली की सड़कों पर तांडव होता रहा और वह आंदोलन को अपने काबू में बताते दिखे। शर्मनाक यह है कि वह अब भी आंदोलन के शांतिपूर्ण और आज के बयान से लग भी रहा है कि आंदोलन सच में ही उनके काबू में था और दिल्ली में वही हुआ जो वह चाहते थे। मगर दिल्ली पुलिस के संयम ने उनकी मंशाओं पर पानी फेर दिया। और यह खीज उनके बयान में झलक भी रही है।

मगर किसान नेताओं के कारनामों और बयानबाजी से सबसे अधिक नुकसान यदि किसी को पहुंचा है तो वह किसान है। इस देश का किसान, देशभक्त किसान, वह किसान जो देश और तिरंगे के लिये सिर कटा भी सकता है और काट भी सकता है। लेकिन आज बदनाम हुआ सिर्फ किसान, निराश हुआ सिर्फ किसान, नुकसान में रहा सिर्फ किसान और यह सब हुआ किसान नेताओं के कारण। किसान का दोष सिर्फ इतना रहा कि उन्होंने राजनीति चमकाने में जुटे तथाकथित नेताओं पर भरोसा किया और घर-बार छोड़ कर उनके पीछे चल दिये। नेताजी तो अब भी मीडिया में चमक रहे हैं, एक-दूसरे पर आरोेप लगा कर खुद को पाक-साफ साबित कर रहे हैं। और नेताजी हैं, वो तो जोड़-तोड़ कर माफी ले ही लंेगे मगर किसान की छवि जो धूमिल हुई है उसकी भरपाई कैसे होगी। इसका जवाब शायद ही इन नेताओं के पास हो।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

बजट 2024: उच्च शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को घरेलू संस्थानों...

बजट में रक्षा मंत्रालय को मिला सबसे ज़्यादा पैसा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मंगलवार को संसद में...

नीट-यूजी परीक्षा रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार, याचिकाएं ख़ारिज

सुप्रीम कोर्ट ने विवादों में घिरी नीट-यूजी 2024 परीक्षा...

बजट 2024: स्वास्थ्य क्षेत्र की उम्मीद भरी नज़रें वित्त मंत्री पर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को आम बजट...