मथुरा में वैष्णव कुंभ में पहुंचे प्रसिद्ध कथावाचक रमेश भाई ओझा
कहा, यमुना को निर्मल व स्वच्छ करने को दृढ़इच्छा शक्ति आवश्यक
मथुरा। सरकार किसी की भी हो यमुना को निर्मल व स्वच्छ करने में समय तो लगेगा लेकिन इसमें दृढ़इच्छा शक्ति की भी आवश्यकता है। आज यमुना किनारे बसे शहर में मौजूद कल-कारखाने कालिया नाग के समान दिखाई देते हैं जो दिन-रात यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं। इसके लिये सबसे अधिक वह अधिकारी जिम्मेदार हैं, जिन पर यमुना के शुद्धिकरण की जिम्मेदारी है।
यह कहना है कथावाचक रमेश भाई ओझा का जो मंगलवार को मथुरा में चल रहे वैष्णव कुंभ में पहुंचे। उन्होंने यमुना की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यमुना को निर्मल करने के लिये कानूनों का कड़ाई से पालन करना आवश्यक है। ऐसा होने पर भी यमुना को निर्मल होने में एक से दो दशक का समय लग सकता है।
मथुरा में चल रहे वैष्णव कुंभ में मंगलवार को प्रख्यात कथावाचक रमेश भाई ओझा रसिया बाबा नगर में चल रहे श्रीनाथ फाग महोत्सव में शामिल हुए। श्रीनाथजी के दर्शन कर यमुना पूजन करने के बाद उन्होंने यमुना के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की। सत्संग के माध्यम से रमेश भाई ने भक्तजनों से यमुना को निर्मल व स्वच्छ बनाये रखने का अनुरोध करते हुए कहा कि राधा कृष्ण की कृपा बिना यमुना के नहीं मिल सकती।
पत्रकारों से वार्ता के दौरान रमेश भाई ओझा ने विषैली होती जा रही यमुना के लिये उन अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जिनको यमुना को शुद्धिकरण की जिम्मेदारी दी गयी है। उन्होंने यमुना किनारे बसे कल-कारखानों को कालिया नाग के समान बताया जो यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यमुना को निर्मल रखने के लिये नियम-कानून तो बने हुए हैं लेकिन उनका कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है। हमें ध्यान रखना चाहिये की विकास हमारे विनाश का कारण न बन जायेे।

