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Exit Polls: भरोसे लायक नहीं फिर भी होती है चर्चा

आर्टिकल/इंटरव्यूExit Polls: भरोसे लायक नहीं फिर भी होती है चर्चा

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अमित बिश्‍नोई

देश की पांच रियासतों की विधानसभाओं के चुनाव संपन्न हो गए, उम्मीदवारों की किस्मत EVM के अंदर कैद है जो 3 दिसम्बर को आज़ाद होगी, हालाँकि मध्य प्रदेश में पोस्टल बैलेट समय से पहले खोले जाने की ख़बरें भी मीडिया में हैं. चुनाव के बाद नतीजे आने से पहले सरकार बनाने वाले ढेर सारे एग्जिट पोल्स भी आ चुके हैं, और मोटा मोटी देखें तो सत्ताधारी भी सरकार बना रहे हैं और विपक्ष भी. लगभग हर मीडिया हाउस ने अपने अपने अनुमान लगा लिए हैं या कहिये तुक्के लगा दिए हैं, जिसका सही बैठ गया वो अपनी पीठ थपथपायेगा जिनका गलत साबित हुआ उनसे कोई सवाल जवाब नहीं, अगले चुनाव में फिर हाज़िर होंगे। एकबार फिर सबको बेवक़ूफ़ बनाएंगे, और लोग ये कहते हुए भी कि एग्जिट पोल पर कोई भरोसा नहीं लेकिन जबतक नतीजे नहीं आ जाते उसपर बहस करते रहेंगे. एग्जिट पोल्स जिसके पक्ष में होते वो खुश जिसके नहीं वो यही कहता है कि नतीजों का इंतज़ार कीजिये, देखिएगा सारे एग्जिट पोल्स धरे धरे के रह जायेंगे।

इसी बात के साथ कि एग्जिट पर कोई भरोसा नहीं हम भी थोड़ा कल शाम आये एग्जिट पोल्स पर थोड़ी बात कर लेते हैं. तो साहब लगभग सात आठ टीवी चैनलों ने किसी सर्वे कंपनी के साथ एग्जिट पोल कराये और अगर इनकी बातों का भरोसा करें तो ऐसा लगता है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सत्ता बरकरार रहने वाली है जबकि तेलंगाना में KCR की विदाई होने वाली और जिस पार्टी की वजह से तेलंगाना राज्य का गठन हुआ उसकी पहली बार सरकार बनने जा रही है यानि कांग्रेस पार्टी दक्षिण के एक और राज्य पर कब्ज़ा कर सकती है, रही बात मिजोरम की तो वहां पर भी MNF की सत्ता जाते हुए दिख रही है, सरकार किसकी बनेगी इसपर अभी कुछ साफ़ नहीं है. तो इन एग्जिट पोल्स के नतीजों से माना जा सकता है कि राज्यों में क्षेत्रीय क्षत्रपों का जलवा रहने वाला है, फिर वो चाहे राजस्थान के अशोक गेहलोत हों, छत्तीसगढ़ के भूपेश बघेल हों या फिर मध्य प्रदेश के मामा शिवराज चौहान हों.

बात अगर मध्य प्रदेश की करें तो जितने भी एग्जिट पोल्स आये हैं उनके हिसाब से कांग्रेस और भाजपा में कांटे की टक्कर दिख रही है, हालाँकि कुछ में शिवराज सरकार की स्पष्ट वापसी और कुछ में कमल की जगह कमलनाथ के खिलने की बात है. जहाँ तक भाजपा की बात है तो चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में वो कांग्रेस से काफी पिछड़ती हुई दिख रही थी लेकिन जैसे जैसे भाजपा आलाकमान ने शिवराज पर भरोसा जताना शुरू किया और उन्हें तवज्जो देनी शुरू की, सर्वेक्षणों के मुताबिक वो लड़ाई में आती चली गयी और अंत में कांग्रेस के साथ टक्कर के मुकाबले में आ गयी. पीएम मोदी और अमित शाह, जिन्होंने पहले शिवराज को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया था और बाद में गलती का एहसास होने पर मध्य प्रदेश के मामा को तवज्जोह देना एक तरह से भूल सुधार बन सकता है. मध्य प्रदेश में अगर एकबार फिर भाजपा की सरकार बनती है तो इसका पूरा श्रेय शिवराज चौहान और उनकी लाड़ली बहना योजना को जायेगा। अगर ऐसा हुआ तो ये कांग्रेस के लिए और खासकर कमलनाथ के लिए बहुत बड़ा झटका होगा जिन्होंने मुख्यमंत्री बनने की तैयारी भी शुरू कर दी है, उन्हें 3 दिसम्बर तक इंतज़ार करना होगा।

कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ की अगर बात करें तो कमोबेश सभी पोल्स्टर्स की यही राय है कि भूपेश बघेल एकबार फिर मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. राजस्थान की जहाँ तक बात है तो पांचों राज्यों में लोगों को सबसे ज़्यादा दिलचस्पी इसी राज्य को लेकर है. वोटर की तरह यहाँ पर पोल्स्टर्स भी बटे हुए हैं, 40 % भाजपा के साथ तो 40 प्रतिशत ही अशोक गेहलोत के साथ और बाकी सेफ मोड में खेलते हुए नज़दीकी लड़ाई की बात कर रहे हैं, यानि कोई भी सरकार बना सकता है. यहाँ मैंने कांग्रेस की जगह अशोक गेहलोत का नाम इसलिए लिया क्योंकि राजस्थान में चुनाव एकतरह से अशोक गेहलोत की डिलीवर की गयी योजनाओं और मोदी जी की गारंटियों के बीच लड़ा गया है. राजस्थान ऐसा राज्य हैं जहाँ भाजपा ने कांग्रेस से सरकार छीनने की कोई कोशिश नहीं की जैसा कि उसने कर्नाटक और मध्य प्रदेश में किया था, हालाँकि सचिन पायलट की वजह से उसके पास मौके कई बार आये लेकिन शायद गेहलोत की जादूगरी की वजह से भाजपा ने कोई रिस्क उठाना ठीक नहीं समझा। गेहलोत राजस्थान में उतना ही पॉपुलर हैं जितना मध्य प्रदेश में मामा शिवराज। इसलिए गेहलोत सरकार अगर राजस्थान से जाती है तो उसकी वजह सिर्फ राजस्थानियों की मानसिकता ही होगी जो हर बार सरकार बदलने की रही है, सरकार काम अच्छा भी करे तब भी. चुनाव के दौरान ऐसा कहते हुए बहुत से लोग मिले कि गेहलोत सरकार ने बहुत अच्छा काम किया लेकिन हम लोग तो हर बार सरकार बदल देते हैं. ऐसे में अगर कांग्रेस पार्टी की सरकार बरकरार रह गयी तो गेहलोत वाकई जादूगर कहलायेंगे और तब भाजपा के लिए 2024 को लेकर ज़्यादा चिंतित होना पड़ेगा।

तो चलिए हमने भी एग्जिट पोल्स पर भरोसा न करते हुए भी इस पर थोड़ी चर्चा कर ली. अब तीन दिसम्बर को देखेंगे कि कौन से टीवी चैनल के एंकर्स सबसे सटीक नतीजों का गलाफाड़ दावा कर रहे होंगे।

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