- प्राइवेट अस्पतालों में एडमिट मरीजों को आ रही दिक्कत
- नियमों की धज्जियां, मनमर्जी दामों पर बिक रही दवाई
अमित बिश्नोई
मेरठ। कोरोना संक्रमण की रफ्तार बहुत तेजी से बढ़ रही है. इसके साथ ही गंभीर मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. ऐसे में लाइफ सेविंग रेमडिसिवर इंजेक्शनों की बिक्री पर मनमाफ़िक दाम वसूलने के खेल भी सामने आने लगा है। मौत से डराकर न केवल इंजेक्शन की काला बाज़ारी हो रही है बल्कि तीमारदार कीमत से कई गुना दाम चुकाने को मजबूर हैं। इलाज में देरी की वजह से मरीजों की जान पर भी बन आई है. मेरठ समेत कमोबेश प्रदेश से सभी जिलों का यही हाल है
ये है स्थिति
रेमडिसिवर इंजेक्शन की मांग बढऩे और मानकों के चलते इसे मनमर्जी दामों पर बेचने का खेल धडल्ले से चल रहा है. तीमारदारों के मुताबिक प्राइवेट अस्पताल आउट ऑफ स्टॉक होने की बात कहकर तीमारदारों से इसे बाहर से मंगवा रहे हैं, वहीं अस्पताल की ओर से लिखित प्रिस्क्रिपशन न होने की वजह से स्टोर संचालक बिना रिकॉर्ड इसे मनमाने दामों पर बेच रहे हैं. कुछ ज़िलों में 20 हजार रुपये तक में इंजेक्शन खरीदे जाने के मामले सामने आए हैं।
हफ्ते भर में बढ़ी मांग
रेमडिसिवर इंजेक्शनों की जरूरत हफ्ते भर में बेहद तेजी से बढ गई है. पिछले चार महीने से इक्का दुक्का मरीजों पर ही इसका प्रयोग हो रहा था लेकिन कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने के बाद कई मरीजों की हालत गंभीर हो गई है. जिसके चलते रेमडेसिविर इंजेक्शनों की खपत और मांग अप्रत्याशित ढंग से बढ़ी है। अस्पतालों में एडमिट लगभग हर दूसरे मरीज़ पर इसका प्रयोग किया जा रहा है.
तीन दुकानों को लाइसेंस
मेरठ में रेमडिसिवर इंजेक्शन बेचने का लाइसेंस फिलहाल सिर्फ तीन दुकानों के पास हैं. इसमें लालकुर्ती स्थित धर्मा मेडिकल स्टोर व खैर नगर स्थित कूलवैक और परवीन मेडिकल स्टोर ही अधिकृत रूप से इसे बेच सकते हैं. जबकि कोविड-19 प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में इसकी आपूर्ति है.
ड्रग इंस्पेक्टर की अनुमति अनिवार्य
रेमडिसिवर इंजेक्शन खरीदने के लिए अब ड्रग इंस्पेक्टर की मंजूरी अनिवार्य कर दी गयी है. इसके लिए मरीज को जिस भी कोविड- अस्पताल में इसकी जरूरत होगी वहां के डॉक्टर की ओर से अस्पताल में इसकी उपलब्धता न होने का लिखित लेटर होना चाहिए। पूरा रिकॉर्ड चेक करने के बाद ही ड्रग इंस्पेक्टर की अनुमति मिलने के बाद ही इसे तय दुकानों से खरीदा जा सकता है।
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6 वायल का कोर्स
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 अस्पताल के इंचार्ज डा. टीवीएस आर्या बताते हैं कि रेमडिसिवर इंजेक्शन का एक मरीज के लिए 6 वायल का 5 दिन का कोर्स होता है. इसका काम फेफड़ों में जमा संक्रमण को बाहर निकालने के लिए होता है. इसका प्रयोग हर मरीज के लिए जरूरी नहीं हैं. मरीज की स्थिति के अनुसार ही उसे डोज दी जाती है.
19 सौ रूपये हुआ सस्ता
रेमडेसिविर इंजेक्शन बाजार में अलग-अलग कंपनियों का 900 रूपये से 54 सौ रूपये कीमत तक में उपलब्ध है. केंद्र सरकार की ओर से शनिवार को इसके दाम 19 सौ रूपये तक घटा दिए हैं.
इनका है कहना
रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने के लिए पहले ड्रग विभाग से मंजूरी लेनी जरूरी है. अस्पताल स्टॉक में न होने पर ही इसे मरीज से मंगवा सकते हैं. अगर कोई मनमर्जी दामों पर इसे बेच रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
पवन शाक्य, ड्रग इंस्पेक्टर, मेरठ.

