लखनऊ। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव (Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav) बड़ा दांव खेलने जा रहे हैं। वो अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे सकते हैं और उपचुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य को उतार सकते हैं। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर ऐसा होता है तो अखिलेश यादव का यह बड़ा दांव होगा। साथ ही स्वामी प्रसाद मौर्य के सहारे मौर्य-शाक्य वोट बैंक को साधने की कोशिश भी होगी। जिसका लाभ लोकसभा चुनाव में हो सकता है।
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गौरतलब है कि अखिलेश यादव ( Akhilesh Yadav) ने 2022 विधानसभा का चुनाव मैनपुरी की करहल सीट से जीता था। इसके अलावा वो आजमगढ़ की संसदीय सीट से सांसद भी हैं। ऐसे में उन्हें एक पद छोड़ना होगा। सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव सांसदी बरकरार रखेंगे। ऐसे में उनकी खाली सीट को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक हलकों में कयास लगाये जा रहे हैं कि इस सीट से अखिलेश यादव भाजपा छोड़कर आये पूर्व कैबिनेट मंत्री और कुशीनगर की फाजिलनगर सीट से चुनाव हारने वाले कद्दावर नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को उतार सकते हैं। हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि यहां से धर्मेंद्र यादव के नाम पर भी चर्चा हो रही है। लेकिन, सूत्रों का दावा है कि उन्हें दो साल बाद लोकसभा चुनाव ही लड़ाया जाएगा। आपको बता दें धर्मेंद्र यादव भी अखिलेश यादव के रिश्ते में भाई हैं और बदायूं लोकसभा से सांसद रह चुके हैं। उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य ( Swami Prasad Maurya) की बेटी संघमित्रा ने भाजपा के टिकट पर हराया था। लेकिन, सूत्रों का दावा है कि धर्मेंद्र यादव को संगठन में जिम्मेदारी के साथ लोकसभा चुनाव लड़ाया जा सकता है।
स्वामी प्रसाद मौर्य के भरोसे बड़ा दांव
यूपी में देखा जाए तो मौर्य समाज की आबादी पिछड़ों में यादव और कुर्मी के बाद तीसरे नंबर पर मानी जाती है। करीब 06 फीसदी कुल आबादी है, जिसमें मौर्य, शाक्य और सैनी आते हैं। यूपी की करीब 100 विधानसभाओं में इस समाज की आबादी अच्छी खासी मानी जाती है। स्वामी प्रसाद मौर्य ( Swami Prasad Maurya) का प्रभाव पूर्वांचल से लेकर अवध तक है। बदायूं में भी मौर्य समाज की ठीकठाक आबादी है, जहां से संघमित्रा मौर्य सांसद हैं। अखिलेश यादव की कोशिश है कि स्वामी प्रसाद मौर्य को विधानसभा में भेजकर उनके अनुभव का लाभ लें और साथ ही लोकसभा चुनाव में भी उनकी मदद ली जा सके।
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सदन का है पूरा अनुभव
स्वामी प्रसाद मौर्य ( Swami Prasad Maurya) यूपी की सियासत में बड़ा चेहरा हैं। वह बसपा के फायरब्रांड नेता रहने के साथ प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बसपा की सरकारों में मंत्री रहने के साथ ही नेता विरोधी दल की भूमिका का निर्वहन भी कर चुके हैं। ऐसे में अखिलेश की कोशिश होगी कि अगर सदन में स्वामी प्रसाद मौर्य रहते हैं तो मुद्दों पर भाजपा को घेरने में मदद मिलेगी।

