World Theatre Day: हिंदी सिनेमा के दिग्गजों की यादों में बसा है रंगमंच

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World Theatre Day: हिंदी सिनेमा के दिग्गजों की यादों में बसा है रंगमंच

Zeba Hasan

कहते हैं रंगमंच एक तिलिस्म है और कलाकार रंगमंच को जिंदगी जीने का सलीका कहते हैं। यही वजह है कि रंगमंच के सितारे बड़े पर्दे पर शोहरत पाकर भी थिएटर से मिले हुए प्यार और उसकी यादों को कभी नहीं भूल पाते हैं। शशि कपूर से लेकर ओमपुरी, अनुपम खेर, नसीरउद्दीन शाह, रघुबीर यादव, राजपाल यादव जैसे कई नाम हैं जिन्होंने ऐक्टिंग का ए रंगमंच से सीखा, अपनी ऐक्टिंग को परवान भी मंच पर चढ़ाया। रंगमंच का रास्ता तय करते हुए कई कलाकारों ने हिंदी सिनेमा का सफर तय किया और यहां पर भी अपनी अदाएगी का सिक्का जमाया। विश्व रंगमंच दिवस (World Theatre Day) के अवसर पर युवा पीढ़ी ने भी थिएटर से जुड़े अपने अनुभवों को हमारे साथ साझा किया।

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एनएसडी जाने के लिए पढ़ाई छोड़ दी थी- हिमानी शिवपुरी

बड़े-छोटे पर्दे तथा रंगमंच की अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी भारतीय दर्शकों के बीच किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। डीडी वन के धारावाहिक हमराही की देवकी भौजाई को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं। हम आपके हैं कौन, परदेस, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, कोयला, कुछ कुछ होता है, मैं प्रेम की दीवानी हूं, हम आपके हैं कौन और उमराव जान सहित कई फिल्मों में काम कर चुकीं हिमानी इन दिनों टीवी शो हप्पू सिंह की उलटन पलटन में दर्शकों को खूब हंसा रही हैं। फिल्म और टीवी में सफल पारी खेलने वाली हिमानी आज भी थिएटर को अपना पहला प्यार मानती हैं। सन् 1984 में राष्ट्रीय नाटय विद्यालय (एनएसडी) से पास होकर निकलीं हिमानी कहती हैं कि जब मैं एमफएससी कर रही थी तब मुझे एनएसडी के बारे में पता चला था। तभी मैंने अपनी पढ़ाई छोड़कर एनएसडी रेपटरी जॉइन कर ली थी। रंगमंच के दौरान मि6त्रो मराजानी, ओथेलो, सूर्य की अंतिम किरण से सूर्या की पहली किरण तकआजर का ख्वाब जैसे कई खूबसूरत नाटकों में यादगार किरदार निभाए हैं। आज भी मैं थिएटर को ही अपना पहला प्यार मानती हूं और मुझे दुख होता है जब मैं थिएटर को समय नहीं दे पाती हूं।

मंच था बुरे दौर का साथी- अन्नू कपूर

‘बेताब’ का चेलाराम या फिर ‘चमेली की शादी’ का छदम्मी लाल। ‘ऐतराज’ का बैरिस्टर राम चोटरानी या फिर ‘विक्की डोनर’ का डॉक्टर बलदेव चड्ढा। इन हिट फिल्मों के साथ अन्नू कपूर का हर किरदार दर्शकों के जेहन में आज भी ताजा है। अन्नू कपूर जब 23 साल के थे तो एक नाटक में उन्होंने 70 साल के बूढ़े शख्स का किरदार निभाया था। इस नाटक को श्याम बेनेगल ने देखा और अपनी फिल्म मंडी में साइन कर लिया। एक इंटरव्यू के दौरान अन्नू कपूर ने बताया था कि लखनऊ से उनका खास नाता है। अन्नू ने कहा ‘आज से करीब 43 साल पहले मैं अपनी मां से नाराज होकर लखनऊ चला आया था। लवलेन मार्केट थी और उसी की छत पर डिलाइट होटल था। वहीं, चोपड़ा जी का ऑफिस था। उस बुरे दौर में मुझे उन्हीं के यहां पनाह मिली थी। मैं वहीं ऑफिस की बेंच पर रात में सोया करता था। लखनऊ और आसपास में जब कभी कोई स्टेज शो होता तो मैं भी उसमें पहुंच जाता। कभी पांच मिनट गाना गाता तो कभी मिमिक्री करता। उन शो में मुझे पांच-पांच रुपये मिल जाया करते थे। रंगमच ने ही मुझे मेरी पहली फिल्म मंडी में काम दिलाया था। और इसी मंच ने बुरे दौर में मेरा साथ दिया था’।

थिएटर की वजह से ही ऐक्टिंग में हूं- अहाना कुमरा

फिल्म और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ऐक्टिंग का सिक्का जमाने वाली ऐक्ट्रेस अहाना कुमरा कहती हैं कि आज मैं अगर ऐक्टर हूं तो इसकी वजह थिएटर ही है। बाई जॉर्ज मेरा पहला नाटक था जिसने मंच पर मुझे पहचान दी थी। इस नाटक का निर्देशन किया था नसीरउद्दीन शाह ने। अपनी परफारमेंस के बाद मेरी खुद की खुशी का ठिकाना नहीं था। मेरी आखों में खुशी के आंसू थे। उस वक्त मैं गई और मैंने नसीर सर को गले लगा लिया था। तो यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर रंगमंच का हिस्सा नहीं होती तो शायद आज फिल्मों में भी नहीं होती।

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आठ साल की उम्र में किया पहला नाटक- राजीव सिद्धार्थ

राजीव सिद्धार्थ अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत को याद करते हुए कहते हैं कि जब मैं आठ साल का था मैंने अपना पहला नाटक किया था ‘द स्टोन सूप’। बस उसी वक्त से मेरा रिश्ता थिएटर के साथ जुड़ गया था और शुरू हो गई थी एक नई कहानी। मैं स्टोज जब स्टेज पर अपनी जैकेट उतार कर डायलॉग बोला था मुझे लगता है उसी वक्त से मेरे इस सफर की शुरुआत हो गई थी। मैं खुद को खुश नसीब मानता हूं कि मुझे कई बड़े शोज नामी कलाकारों के साथ करने का मौका मिला है।

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