देव से देवी बनकर पहुंच गईं शोहरत की बुलंदी पर

एंटरटेनमेंटदेव से देवी बनकर पहुंच गईं शोहरत की बुलंदी पर

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एला डी वर्मा की जिंदगी किसी रील लाइफ से कम नहीं

ट्रांस ब्यूटी क्वीन खिताब, सोशल मीडिया की फेमस पर्सनैलिटी, सोशल वर्कर और अब ऐक्टिंग में नाम कमा रही हैं एला

देव को बचपन से लड़कियों के साथ खेलना, उनकी तरह तैयार होना, उठना बैठना सब कुछ आकर्शित करता था। कम उम्र देव की यह बातें किसी को नहीं अखरती थी। लेकिन जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती गई उन्हें अपने शरीर के साथ कुछ अलग सा महसूस होने लगा। उनका दिल और दिमाग में एक उलझन सी चलने लगी। जिसके चलते कई बार उनका मज़ाक भी उड़ा, परिवार से डांट भी पड़ी और फिर शुरू हुआ गिल्ट। किशोर अवस्था में कभी स्कूल में तो कभी मोहल्ले में मजाक का पात्र बनने वाले देव आज एला डी वर्मा के नाम से ना सिर्फ देश में बल्कि विदेश में भी अपनी खास पहचान बना चुकी हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं इंडिया की पहली ट्रांस क्वीन एला डी वर्मा की।

सोशल मीडिया से लेकर ऐक्टिंग तक

एला डी’वर्मा डिजिटल कंटेंट क्रिएटर, मॉडल और सोशल मीडिया की फेमस पर्सनैलिटी बन चुकी है। जो अपनी जेंडर ट्रांजिशन जर्नी और बेबाक विचारों के लिए जानी जाती हैं। यही नहीं इन दिनों एला वेब सीरीज पीएसआई मंगल मुखी में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। पीएसआई मंगलमुखी’ एक बहुचर्चित हिंदी क्राइम-थ्रिलर और सोशल ड्रामा वेब सीरीज है। जिसकी कहानी एक ट्रांसजेंडर सब-इस्पेक्टर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो समाज और पुलिस बल में अपने सम्मान व पहचान के लिए लड़ती रहती है। मंगलमुखी उत्तर प्रदेश पुलिस में एक ट्रांसजेंडर सब-इस्पेक्टर हैं। जब एक टीवी स्टार की शूटिंग के दौरान रहस्यमयी तरीके से मौत हो जाती है, तो वह इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच करती हैं और अपनी काबिलियत साबित करने के लिए वाराणसी से मुंबई तक का सफर तय करती हैं। इस वेब एला के साथ रति पांडे, नमिश तनेजा और तान्या शर्मा भी हैं।

रील से कम नहीं थी रियल लाइफ

मंगलमुखी में अपनी पहचान के लिए एला जिस तरह से जद्दोजहद करती हैं अपनी अस्ल जिंदगी में भी उन्हें अपनी पहचान के लिए लंबे संघर्ष से गुजरना पड़ा है। मानसिक, समाजिक, शारीरिक हर फेज पर उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। देव वर्मा के रूप में जन्मीं एला को प्यूबर्टी की उम्र में जब यह महसूस हुआ कि बस अब मुझे और नहीं ऐसे रहना और सहना है, सो उन्होंने इस बात को अपने परिवार के सामने रख दिया। परिवार उनकी बात सुनकर शॉक में था। उन्होंने हर कोशिश की मेरी राय को बदलने की। डॉक्टर की सलह ली गई, मनोवैज्ञानिक के पास चक्कर लगाए गए लेकिन कोई उपाय नहीं मिला। फिर मेरे परिवार ने भी मेरेी मानसिक स्थिति और मेरी शारीरिक बदलाव को समझा और मेरा पूरा सपोर्ट किया।

किया 18 साल के पूरे होने का इंतजा

यह बदलाव उनकी जिंदगी का बड़ा मोड़ था। 14 साल की उम्र में एला को जेंडर डिस्फोरिया यानी बायोलॉजिकल सेक्स और जेंडर आइडेंटिटी का मिक्स मैच होना बताया। जेंडर ट्रांजिशन , लड़के से लड़की बनने के इस सफर में उनके साथ उनके पेरेंट्स की कई बार काउंसलिंग हुई। लड़का से लड़की बनने के ट्रांसफॉरमेशन में कानूनन बालिग यानी 18 साल का होना जरूरी था। इस बीच घर-परिवार और समाज के कई अच्छे-बुरे पहलुओं से एला का सामना हुआ। एला डरी, सहमी और अपने आप में गुम रहने लगीं और इस तरह उनकी 12वीं तक की स्कूली शिक्षा भी अप एंड डाउन में गुजर गई। एला की मां इस लड़ाई को फ्रंट पर आकर लड़ने की ठानी और उन्हें भी हिम्मत दी। जिसके बाद एला का लॉकडाउन में हार्मोन ट्रीटमेंट शुरू हुआ जब वह 18 साल की हो गईं। ये एक लंबा प्रोसेस रहा। इस दौरान उन्हें मेल हार्मोन को सप्रेस करने और फीमेल हार्मोन को इंट्रोड्यूस करने के लिए दवाइयां दी गईं। जो उनके लिए इमोशनली और फिजिकली दोनों तरह से चैलेंजिंग था।

लॉकडाउन में शुरू हुआ था सफर

एला ने लॉकडाउन के दौरान ही सोशल मीडिया पर लोगों से कॉन्टेक्ट करने की शुरुआत की। यहां उनका मकसद लोगों में ट्रांस लोगों को लेकर एक जागरूकता फैलाना और अपनी जिंदगी को और बेहतर ढंग से समझना था। इंस्टाग्राम पर जैसे-जैसे एला के फॉलोअर्स बढ़े, उनका हौसला भी बढ़ा और वो लोगों के बीच पॉपुलर होने लगीं। फिर एला के पास ब्रांड प्रोमोशन और मॉडलिंग के ऑफर आने लगे। उन्होंने ब्यूटी पैजेंट में ट्रांस क्वीन फस्टर् रनअरअप का खिताब जीता। हालांकि उन्हें अपने ही स्कूल से 10वीं और 12वीं के डॉक्यूमेंट्स पर नाम और जेंडर चेंज करवाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा।

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