One nation One election: ‘एक देश एक चुनाव’ पर केंद्र सरकार ने आठ सदस्यीय समिति का गठन किया है। कानून मंत्रालय ने इसे लेकर अधिसूचना जारी की है। इसमें कहा है कि राष्ट्रीय हित में देश में एक साथ चुनाव कराना जरूरी है। ऐसे में केंद्र सरकार एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन करती है।
समिति का नेतृत्व पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद करेंगे
कानून मंत्रालय के अनुसार, इस समिति का नेतृत्व पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद करेंगे। इसी के साथ इस कमेटी में गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, गुलाम नबी आज़ाद, सुभाष सी कश्यप, एनके सिंह, हरीश साल्वे और संजय कोठारी सदस्य के रूप में रहेंगे।
बता दें इस हफ्ते मुंबई में जब विपक्षी दलों की बैठक की तैयारी हो रही थी। तब बैठक से पहले दिल्ली से एक खबर आई कि संसद का विशेष सत्र सितंबर में पांच दिन के लिए बुलाया जा रहा है। इससे कयास लगाए जाने लगे कि क्या सरकार, ‘एक देश-एक चुनाव’ की दिशा में कदम बढ़ा रही है?
पहले लालकृष्ण आडवाणी ने यह मुद्दा उठाया
पीएम नरेंद्र मोदी सरप्राइज देने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि सत्र ‘एक देश-एक चुनाव’ को लेकर है। भारत एक संघीय लोकतंत्र हैं, जहां लोगों को अपने राज्यों और संस्कृतियों के बारे में बात रखने का मौका मिलता है, लेकिन राष्ट्रीय एजेंडा पीछे छूट जाता है। यही कारण है कि इसकी जरूरत महसूस की जा रही है। पहले लालकृष्ण आडवाणी ने यह मुद्दा उठाया था। इससे चुनाव खर्च में कमी आएगी, साथ ही सुरक्षा बलों और चुनाव कराने के लिए बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की जरूरत होगी। यकीनन यह अच्छा विचार है। लोग कह रहे हैं कि इससे क्षेत्रीय दलों को नुकसान होगा। लेकिन मतदाता काफी समझदार हैं और ऐसा नहीं है कि एक साथ चुनाव कराने से क्षेत्रीय दलों को नुकसान होगा। अभी देश में अनेक झंडे हैं। लेकिन कोई नेशनल एजेंडा नहीं है।

