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भारत में अनपढ़ों की तुलना में पढ़े लिखे बेरोज़गार 9 गुना ज़्यादा: रिपोर्ट

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भारत में बेरोज़गारी सबसे बड़ा मुद्दा है, यही वजह है कि राजनीतिक पार्टियां इसे चुनाव जीतने का हथियार बनाती हैं। प्रधानमंत्री मोदी हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा करके सत्ता पर काबिज़ हो चुके हैं लेकिन देश का युवा बेरोज़गार आज भी उन दो करोड़ नौकरियों की राह देख रहा है. कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने इस बार नौकरी की गारंटी का वादा किया है। इन सब चुनावी दावों के बीच इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (ILO) की एक रिपोर्ट सामने आयी है जो ये बताती है कि जो कम पढ़े लिखे हैं या फिर अनपढ़ हैं वो फिर भी रोज़ी रोटी कमा लेते है लेकिन समस्या पढ़े लिखे युवाओं की है, ख़ास वो युवा जिन्होंने उच्च शिक्षा हासिल कर रखी है. इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन की इस रिपोर्ट के मुताबिक अनपढ़ लोगों की तुलना में उच्च शिक्षा लेने वालों की बेरोज़गारी दर कहीं ज़्यादा है।

ILO की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में अनपढ़ युवाओं की बेरोज़गारी दर 3.4 प्रतिशत है वहीँ पढ़े-लिखे ग्रेजुएट्स के लिए बेरोजगारी दर 29.1 प्रतिशत, मतलब 9 गुना ज़्यादा। आईएलओ के आंकड़ों के मुताबिक भारत में शिक्षित युवा बेरोज़गारों का प्रतिशत 2000 के 54.2 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 65.7 प्रतिशत हो गया है। एक बात और, शिक्षित बेरोजगार युवाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 76.7 फीसदी थी जबकि पुरुषों की 62.2 फीसदी थी। इस तरह पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की बेरोज़गारी दर कहीं ज़्यादा है। अभी हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने महिलाओं की बेरोज़गारी का मुद्दा उठाया है, राहुल ने कहा कि देश में महिलाओं की जनसँख्या पचास प्रतिशत है लेकिन जब हम नौकरियों में, रोज़गार में महिलाओं की भागीदारी देखते हैं तो बहुत कम दिखाई देती है। राहुल सवाल करते हैं कि क्या देश में महिला पचास प्रतिशत नहीं हैं? और अगर हैं तो फिर उन्हें नौकरियों और रोज़गार में भागीदारी क्यों नहीं दी जाती.

ILO की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर ज़्यादा है. आईएलओ रिपोर्ट भारत के लेबर मार्केट पर बताती है कि श्रम कौशल और बाजार में पैदा हो रही नौकरियों के बीच काफी असंतुलन है। यह रिपोर्ट आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन की उन चेतावनियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं जिनमें कहा गया था कि ये खतरनाक रुझान भारत की खराब स्कूली शिक्षा के साथ उसकी आर्थिक संभावनाओं को बाधित करेगी। इस रिपोर्ट में भारत में युवाओं की बेरोज़गारी की समस्या को लगातार बढ़ते हुए बताया गया है. एक तरह से कह सकते हैं कि उच्च शिक्षा धीरे धीरे अभिशाप बनती जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक कि भारतीय इकॉनमी नॉन एग्रीकल्चर सेक्टर में नए शिक्षित यूथ लेबर फोर्स के लिए पर्याप्त सैलरी वाली नौकरियां पैदा करने में नाकाम रही है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में युवा बेरोजगारी दर अब दुनिया में सबसे ज़्यादा है.

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