सुल्तान और बंदोबस्त

आर्टिकल/इंटरव्यूसुल्तान और बंदोबस्त

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सुल्तान और बंदोबस्त

अनूप मणि त्रिपाठी

सुल्तान की शाही सवारी जा रही थी। एक नंग धड़ंग शख्स यकबयक सामने आ गया। वह तो गनीमत थी कि शाही ड्राइवर स्मार्ट था, उसने सही वक्त पर रथ को रोक दिया। कहीं खुदकुशी का इरादा तो नहीं था! शाही ड्राइवर ने एक्सट्रा अक्ल लगाई।

मगर अचानक ब्रेक लगने से सुल्तान का संतुलन बिगड़ गया। उसके लाखों-करोड़ों के कीमती हार एक एक-दूसरे से बुरी तरह उलझ गए।

सैनिकों ने उस नंग धड़ंग शख्स को चारो ओर से घेर लिया। अब बस उसका चेहरा नजर आता था।

‘इस बेअदबी का अंजाम जानते हो!’ सुल्तान बिगड़ा।

‘माफ करें सुल्तान! आपको जहमत हुई! मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था, पर क्या करूँ आजकल कंट्रोल में नहीं रहता!’ शख्स ने अपनी बेबसी जाहिर की।

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सुल्तान कुछ रहम पड़ा।

‘क्या कंट्रोल में नहीं रहता!’ सुल्तान ने पूछा।

‘दिलोदिमाग परवर दिगार!’

‘क्यूँ भला!’ सुल्तान कुछ और नरम पड़ा।

‘कुछ बचता ही नहीं!’

‘नशा करते हो!’

‘नहीं हुजूर!’

सुल्तान ने समझा कि शख्स ने उसकी बात समझी नहीं। लिहाजा सुल्तान ने खुलकर पूछा,’पेन किलर लेते हो न!’

‘कहाँ हुजूर!’ शख्स ने इनकार किया।

सुल्तान को कुछ झेल हुई। वह गुस्से से बोला,’झूठ बोला तो सिर कलम हो जाएगा!’ सुल्तान ने अपना इरादा जाहिर कर दिया।

‘आप तो महँगाई का ‘म’ तक नहीं बोलते ज़िल्ले-सुब्हानी!!! रोजमर्रा के बढ़ते दामों ने हमें मार डाला है जहाँपनाह… महँगाई निगोड़ी बिगड़ैल घोड़ी की तरह बिदगती जा रही तो तौबा! तौबा! महँगाई की तरह अब हमारा दिलोदिमाग भी कंट्रोल में नहीं रहता गरीब नवाज!’ उस शख्स के जज्बात उसके कंट्रोल से बाहर होते चले गये। यह सुनकर सुल्तान जोर से खंखारा।

‘मुल्क की बेहतरी के लिए कुछ तो कुर्बानी देनी होगी!’ सुल्तान थोड़ा सख्त होकर बोला।

‘कहिये तो आप के घोड़े के नीचे आ जाएं!’ ‘ शख्स ने बहुत अदब से कहा। सुल्तान मुस्कुराया।

‘क्या नाम है तुम्हारा!’ सुल्तान ने नरमी से पूछा।

‘हुजूर हमें बेहतरउद्दीन कहते हैं!’

‘हम जहाँ जा रहे हैं,वहाँ तुम्हें तुम्हारी सारी मुश्किलों से निजात मिल जाएगी!’ सुल्तान ने ड्राइवर को आगे बढ़ने का हुक्म दिया।

जब सुल्तान की सवारी बढ़ रही थी, तो शख्स ने एक दरबारी से पूछा,’सुल्तान की सवारी कहाँ जा रही हैं जनाब!’

‘पीर बाबा की मजार पे!’ दरबारी ने बताया।

शख्स ने उसे उजबक की तरह देखा। तो दरबारी ने और क्लीयर किया,’देखा नहीं सुल्तान ने तुम्हारा नाम पूछा है!’

‘हाँ पूछा है तो!

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‘तो क्या! बहुत ही किस्मत वाले हो मियां!’

शख्स अभी भी कुछ समझ नहीं पाया। कयास लगाते हुए कि मुल्क के लिए हर पल मशरूफ रहने वाले सुल्तान ने उस जैसे गरीब से बात की! दरबारी से पूछा,’कैसे!’

‘सुल्तान पीर बाबा की मजार पर तुम्हारी बेहतरी के लिए तुम्हारे नाम की चादर चढ़ाएंगे!’ यह कहते हुए वह दरबारी भी वहाँ से रुखसत हो गया।

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