नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि पिछले कुछ दशकों में मनुष्य विकास की अंधी दौड़ में इस तरह उलझा कि मानवता का कल्याण पीछे छूट गया और काफी हद तक उसी का परिणाम है कि समूची दुनिया महामारी की चपेट में है।
दुनिया महामारी की चपेट में
श्री मोदी ने मंगलवार शाम रायसीना संवाद में वीडियो कांफ्रेन्स से अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि यह कार्यक्रम मानव इतिहास के ऐतिहासिक दौर में हो रहा है क्योंकि पूरी दुनिया महामारी की चपेट में है। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष से समूची दुनिया महामारी से जूझ रही है और समाज तथा विज्ञान इससे निपटने में लगा है। सभी सरकारें अपने स्तर पर इस पर काबू पाने में लगी हैं लेकिन सवाल उठता है कि ऐसा क्यों हुआ।
मानवता के कल्याण की चिंता पीछे छूट गयी
प्रधानमंत्री ने कहा , “ संभवत: आर्थिक विकास की दौड़ में मानवता के कल्याण की चिंता कहीं पीछे छूट गयी। शायद प्रतिस्पर्धा के इस युग में सहयोग की भावना को भूला दिया गया। हमारा हाल का अतीत इसका गवाह है। ”
परोक्ष युद्धों के चलते हिंसा का दौर हर जगह जारी
उन्होंने कहा कि दो विश्व युद्धों के बाद समूची अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था बस एक ही दिशा में सोचती रही कि तीसरे विश्व युद्ध को कैसे रोका जाये। इसका मतलब यह हुआ कि दुनिया कारणों का पता लगाये बिना ही रोगी का उपचार करने में जुट गयी। मानवता को तीसरे विश्व युद्ध का सामना तो नहीं करना पड़ा लेकिन हिंसा का खतरा कम नहीं हुआ और परोक्ष युद्धों तथा आतंकवादी हमलों के चलते हिंसा का दौर हर जगह जारी है।

