अनूप मणि त्रिपाठी
यूँ तो राजा के बहुत सारे शौक थे। होते ही हैं! राजा है तो होने भी चाहिए! ऐसा लोग-बाग मानते भी हैं। इसमें कहीं कोई दिक्कत भी नहीं है।
…तो राजा को बहुत बोलने का शौक था। जिसे अलंकारिक भाषा में भाषण कहते हैं। वैसे ही, भाषण के अतिरिक्त कुछ अन्य भी शौक थे उसके, जैसे उद्घाटन,शिलान्यास करना। इसमें उसे बड़ा मजा आता। उसका यह शौक इतना बढ़ गया था कि कुछ दिनों तक अगर उद्घाटन करने को नहीं मिल रहा होता,तो पुरानी ही चीजों का रंग रोगन करा कर उद्घाटन कर मरता था।
आज सुबह से ही राजा बहुत खुश है और एक्साइटेड भी है। आज उसे करोड़ों की लागत से बनी एक नई नवेली सड़क का उद्घाटन करने जाना है। राजा सुबह से ही सज-धज कर तैयार बैठा है। वह नियत समय पर निश्चित जगह पर वह अपनी लंबी-चौड़ी राजसी टीम के साथ पहुँच गया उद्घाटन करने।
हमेशा की तरह राजा का जोरदार स्वागत हुआ। मीडिया मरी जाती थी इस ‘ऐतिहासिक अवसर’ को जनता को दिखाए जाने के लिए और खुद को राजा को दिखाने के लिए। इस चक्कर में बहुतेरे तो सड़क पर लेट भी चुके थे। वे एक पल के लिए भी चूकना नहीं चाहते थे। राजा के स्वागत में फूल ज्यादा बिखरे थे या कैमरे ज्यादा बिछे थे,ये बताना मुश्किल नहीं था। निश्चित ही वहाँ कैमरों की संख्या ज्यादा थी।
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मीडिया के अनुसार…
यह वही सड़क है, जिससे होकर विकास जाने वाला है।
यह वही सड़क है, जो राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आतुर है।
यह वही सड़क है,जिस पर राष्ट्र का सही इतिहास लिखा जाने वाला है।
यह वही सड़क है, जिसको बनवाने वाली कंपनी ने राजा पोषित निधि में राष्ट्र निर्माण के लिए लाखों का चंदा दिया।
यह वही सड़क है, जिस पर आम नागरिकों को चलने पर गर्व होगा।
यह वही आधे किलोमीटर की सड़क है, जिसके लिये राजा जी मीलों का सफर तय करके आए।
यह सड़क नहीं , राजा जी की तपस्या का फल है।( मीडिया ने इस पंक्ति को बार-बार दोहराया।)
…. और इन्हीं सारी बातों को राजा भी अपने अंदाज में सड़क उद्घाटन के उपरांत कहने वाला था।
कुछ औपचारिकताओं के बाद अब बारी थी नई सड़क के उद्घाटन की।
राजा ने नारियल उठाया और उसे सड़क पर पटक दिया। जोरदार तालियाँ बजीं। सामान्यतः नारियल के दो टुकड़े होने चाहिए थे, मगर ऐसा नहीं हुआ। कैमरों ने देखा कि राजा ने जहाँ नारियल पटका था, वहाँ गड्ढा हो गया। नारियल तो अक्षुण्ण बना रहा,मगर नई नवेली सड़क वहाँ धंस गयी,जहाँ नारियल को पटका गया था। राजा ने भी यह देखा। कुछ पल के लिये सन्नाटा छा गया। जो रिपोर्टर सजीव प्रसारण कर रहे थे, सहसा वे निर्जीव-से हो गए। दरबारी सहित सभी की जान सूख-सी गयी।
राजा अविचल खड़ा रहा। राजा ने नारियल को दुबारा पटका। अब वह दो टुकड़ों में था। राजा ने गड्ढे को देखा। कुछ क्षण शान्ति के बाद गड्ढे को देखकर राजा ताली पीटकर जोर से हँस पड़ा। राजा के हँसते ही फिर मंत्री हँसा। मंत्री के हँसते ही दरबारी हँसे। दरबारी के हँसते ही मीडियाकर्मी हँसे। और देखते ही देखते वहाँ सब हँसने लगे। एक बार फिर हर्षोल्लास का माहौल निर्मित हो गया।
राजा ने मंत्री के कान में बोला,’अब देखो!’
मंत्री चुपचाप देखने लगा। आगे क्या होने वाला है, यह सोच कर वह रोमांचित हो गया। जबकि वह ठीक-ठाक अनुभवी था।
राजा ने कैमरों की ओर मुँह करके किसी बॉडी बिल्डर की तरह अपनी दोनो बाँहों को मोड़ा। ठीक वैसे ही जब वे शारीरिक सौष्ठव का प्रदर्शन करते हैं। राजा की इस भंगिमा को देखकर मीडियाकर्मी जोश से भर उठे। ऐसा करते ही वहाँ राजा की जय जयकार होने लगी।
देखते ही देखते मीडियाकर्मी समवेत स्वर में चीख-चीख कर समस्त राष्ट्र को राजा के लेटेस्ट पराक्रम के बारे में बताने लगे। राजा को बाहुबली की उपाधि से नवाजने लगे। देखिये! राजा की अतुलनीय शक्ति !नारियल को दिया पटक तो सड़क गई चटक!
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परन्तु एक महिला मीडियाकर्मी ने रिपोर्टिंग में सबसे बाजी मार ली। जब उसने बहुत अदा से यह कहा कि इतना बलशाली राजा, मगर रहता कितना सिंपल है/ यह सड़क का गड्ढा नहीं,ये तो उसका डिंपल है!
राजा के इस पराक्रम की चर्चा मीडिया में जोरोशोरो से हो रही थी… मंत्री मन ही मन राजा की इस अदा पर दाद दे रहा था… देखने वाली भीड़ गदगद थी और गड्ढा…
गड्ढा शर्म से गड़ा जा रहा था…

