मुजफ्फरनगर। मोदी सरकार के नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन मुजफ्फरनगर महापंचायत से एक बार फिर गरमा गया है। इसके मद्देनजर इस शहर की सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई है। व्यवसायिक व सरकारी बड़े प्रतिष्ठाानों को भी सुरक्षा घेरे में रखा गया है। इतना ही नहीं केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और विधायक उमेश मालिक के आवासों पर भारी पुलिस फोर्स सुरक्षा के तहत लागा दी गई है।
सख्त सुरक्षा के तहत मुजफ्फरनगर में अधिकारियों ने महापंचायत को देखते हुए यहां की सभी शराब की दुकानों को बंद करने का आदेश दिया। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह के मुताबिक, शनिवार शाम छह बजे से पांच सितंबर को महापंचायत का अंत हो जाने तक सभी शराब की शॉप्स बंद रहेंगी।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में संडे के दिन मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत किसानों की भारी भीड़ उमड़ी नजर आ रही है। किसान संगठनों का दावा है कि पिछले नौ महीनों में अब तक की सबसे बड़ी महापंचायत यह साबित होगी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने किसान महापंचायत को देखते हुए कमर कस रखी है। यहां सौ हेल्थ कैम्त्प और भोजन के पांच सौ लंगर भी चलते रहेंगे।

किसानों की यह महापंचायत देश में लागू तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर है। एक महिला किसान के मुताबिक, हम तीन कृषि कानूनों को निरस्त कराने की मांग को लेकर यहां एकजुट हैं। हम प्रधानमंत्री से तीन कानूनों को वापस लेने का विनम्र आग्रह करते है। हरियाणा से आया एक किसान बोला कि, हमारे पीएम के लिए किसानों का कोई सम्मान नहीं है। सवाल उठाया कि आखिर मोदी जी कैसे राजा हैं जो वह सर्दियों में भी अपनी प्रजा यानि किसानों को धराना देने पर मजबूर कर रहे हैं?
कुल 32 किसान संघ जो कि पंजाब राज्य के हैं, ने राज्य सरकार को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस वापस लेने के लिए 8 सितंबर की समय सीमा दी। मोर्चा ने कहा कि यदि इन मामलों को वापस नहीं लिया जाता तो किसान 8 सितंबर को बड़ा विरोध-प्रदर्शन करने की रणनीति बना लेंगे।
गौरतलब है कि, तीन विवादास्पद कूषि कानूनों की मुखालफत में दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का विरोध-प्रदर्शन नौ महीने से अधिक समय से जारी है। किसानों का दावा है कि नये कानून एमएसपी सिस्टम को समाप्त कर देंगे और किसानों को बड़े कॉरपोरेट घरानों की रहम पर छोड़ दिया जाएगा।
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