मरीज को चारपाई पर ले जाते फोटो को देख कांग्रेस महासचिव ने योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराया
मरीज के परिजन बोले, हमने नहीं मांगी कोई मदद, हमारे घर पर तो फोन भी नहीं
मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश में चुनावी बिसात बिछने के साथ सोशल मीडिया पर राजनीतिक जंग शुरू हो गयी है। कोई भी राजनीतिक दल इस समय विपक्षी पार्टी को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर लगातार हमलावर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक मरीज को चारपाई पर ले जाते परिवारजन के फोटो को देख कांग्रेस महासचिव ने योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराया। प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर सरकार पर सवाल उठाते हुए इसे उत्तर प्रदेश सरकार की सिस्टम की हकीकत बताया है। हालांकि मरीज के परिवार का कहना है कि उन्होंने एंबुलेंस के लिये कोई फोन नहीं किया था। उनके घर पर तो फोन भी नहीं है।
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में शुक्रवार को चारपाई पर लिटाकर मरीज को अस्पताल ले जाते परिवारजनों का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुुआ था। इस फोटो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने योगी सरकार पर हमला बोला है।
प्रियंका गांधी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा- ‘कागजों पर उप्र में कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी हो चुकी है। धड़ाधड़ मीटिंगों का दौर जारी है कि चुनाव कैसे लड़े जाएं, मंत्री पदों की रेवड़ियां कैसे बांटी। दिल्ली, मुंबई, बंगलौर सब जगह झूठे प्रचार की होर्डिंग लग चुकी है कि ‘यूपी में सब चंगा सी’। लेकिन, मिर्जापुर से आई ये तस्वीर उप्र सरकार के सिस्टम की हकीकत बयां करती है। मिर्जापुर के श्री सत्तू मुसहर जी दर्द से कराह रहे थे। उन्हें तमाम प्रयासों के बावजूद एंबुलेंस नहीं मिली। उनके परिजन इस तरह से इस कड़ी धूप में 8 किमी चलकर उन्हें अस्पताल लेकर गए। डर ये है कि इस सच्चाई को बाहर लाने वालों पर कहीं यूपी सरकार एनएसए न लगा दे।
वहीं लालगंज के तिलांव के रहने वाले सत्तु मुसहर के परिवारजनों का कहना है कि उल्टी-दस्त होने पर वह सत्तु मुसहर को दो किलोमीटर दूर प्राइवेट डाॅक्टर को दिखाने ले गये थे। उन्होंने एंबुलेंस की मदद के लिये कोई फोन नहीं किया था। बल्कि उनके घर पर तो फोन भी नहीं है। दवा खाने के बाद सत्तु मुसहर की तबियत भी ठीक हो गयी है। वहीं जिलाधिकारी प्रवीण लक्षकार ने भी प्रियंका गांधी के दावे के विपरित कहा कि मरीज के परिवार द्वारा कोई भी फोन एम्बुलेंस को नहीं किया गया था। अगर फोन किया जाता तो एंबुलेंस की सुविधा जरूर मिलती।

