दुत्कार और पुचकार, मोदी जी का यह कैसा व्यवहार?

आर्टिकल/इंटरव्यूदुत्कार और पुचकार, मोदी जी का यह कैसा व्यवहार?

Date:


दुत्कार और पुचकार, मोदी जी का यह कैसा व्यवहार?

अमित बिश्‍नोई

किसी साम्राज्य को खड़ा करने में बेशक सम्राट का बहुत बड़ा हाथ होता है लेकिन उस साम्राज्य को और सम्राट की शान को स्थापित रखने में राज्यों के क्षत्रपों का उससे बड़ा हाथ होता है. नरेंद्र दामोदारदास मोदी 2014 में राजा से सम्राट बने और फिर साम्राज्य को बढ़ाना शुरू किया, एक के बाद एक राज्य फतह करने लगे. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भगवा लहराने लगा, लोकप्रियता आसमान छूने लगी, लोंगो में भक्तिभाव बढ़ता गया, यहाँ तक कि पूजा भी होने लगी. इस बीच इस भगवा पार्टी का पूरे देश में फैला नेतृत्व सिकुड़कर एक व्यक्ति पर आधारित हो गया. जो पार्टी नेतृत्व के मामले में पहले विकेन्द्रित थी, बोलें तो सबका साथ सबका विकास, वह पार्टी एक व्यक्ति पर केंद्रित हो गयी. चलिए अब बात करते हैं यूपी के चुनाव की क्योंकि ऊपर कही गयी बातों का सम्बन्ध उसी से है.

यूपी, जहाँ से दिल्ली की सत्ता तक रास्ता जाता है, कुछ ही दिनों बाद यहाँ विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाएगी। राजनीतिक पार्टियां तो चुनावी मोड में रहती ही हैं, प्रदेश की जनता भी अब तमाम परेशानियों और समस्याओं को भुलाकर राजनीति के रंग में रंग चुकी है. जनता के मन में क्या है यह वही जाने पर राजनेताओं, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी के अंदर क्या चल रहा है, आज बात उसपर करूंगा।

मीडिया के माध्यम से आप लोगों को जानकारी तो होगी ही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी चुनावी दौरों की रफ़्तार बढ़ चुकी है. सरकारी इसलिए कि अभी वह यूपी के लिए पिछले पौने पांच साल से जमा की योजनाओं के लोकार्पण, उद्घाटन और शिलान्यास के बहाने अपनी तारीफ और विपक्ष की बुराइयां करके पार्टी के लिए चुनावी माहौल बना रहे हैं. इन आयोजनों में योजनाओं का ज़िक्र तो थोड़ा होता है, ज़्यादा समय इतिहास को दिया जाता है, इतिहास यानी पहले की सरकारों का कच्चा चिटठा। इन सारे सरकारी आयोजनों में वह अपनी बड़ाई, विपक्ष की बुराई के साथ साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करना नहीं भूलते।

Read also: यूपी के चुनावी महाभारत में तेज हुए मोदी और अखिलेश के शब्दबाण

योगी जी के लिए उनकी ताज़ा तारीफ “उपयोगी योगी” है. मोदी जी अपने हर भाषण में जमकर केंद्र की योजनाओं का ज़िक्र करते हैं और लोगों को यह पूरी तरह जताने का प्रयास करते हैं कि आपको जो कुछ भी मिल रहा है उसे मैं दे रहा हूँ, एक तरह से वह राज्य के नेतृत्व को बौना साबित करते हैं. एक वीडियो वायरल हुई थी मोदी जी के कार में बैठने और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी के कार के पीछे पीछे पैदल चलने की. यह वायरल वीडियो बहुत कुछ साबित करती है, बिलकुल मुलायम और मोहन भागवत उस तस्वीर की तरह जिसपर भाजपा ने कैप्शन लिखा था “तस्वीर बहुत कुछ बोलती है”.

कहने का मतलब यह कि मोदी जी उपयोगी योगी कहकर यह भी जताते हैं कि तुम ही सबकुछ हो और पैदल चलवाकर यह एहसास भी करा देते हैं कि तुम्हारी हैसियत यह है. पुचकार और दुत्कार एक सामंतवादी मानसिकता की द्योतक तक है. अपना काम निकालने का एक बढ़िया हथियार भी। दुत्कार इसलिए कि चेला ज़्यादा उड़ने न लगे और पुचकार इसलिए कि चेला कहीं भड़क न जाय.

भड़कने से याद आया कि कुछ महीने पहले चेला भड़का हुआ था, लखनऊ से दिल्ली तक बैठकों के दौर चलने लगे थे, पर कतरने के लिए एक आईएएस का इस्तीफ़ा करवाकर पार्टी ज्वाइन करवा दी गयी थी, पार्टी में भौचाल आया हुआ था. जैसे तैसे मामला शांत हुआ. क्षत्रिय खून वाला चेला भी शांत हुआ. पर लगता है गुरु के मन में अब भी कसक है. वरना पैदल चलने वाली घटना न होती।

बहारहाल यूपी में मौजूदा चुनावी माहौल बड़ा दिलचस्प होता जा रहा है, मोदी जी को अच्छी तरह मालूम है कि प्रदेश में चुनाव जीतने के लिए सिर्फ वह ही काफी नहीं हैं उन्हें योगी जी की ज़रुरत है और इसीलिए योगी जी अब यूपी के लिए उपयोगी हैं. जहाँ तक योगी जी की बात है तो उन्होंने भी समय के साथ समझौता कर लिया है और इसीलिए उनकी कोई भी बात अब मोदी जी की वंदना से ही शुरू होती है. वह अपने काम का क्रेडिट भी मोदी जी को ही दे देते हैं.

See also: विचार चित्रण – योगी जी यो गी ..

फिलहाल मोदी और योगी के बीच जो कुछ चल रहा है वह पार्टी के लिए अच्छा संकेत नहीं। मोदी जी को क्षत्रपों के महत्त्व को समझना होगा और योगी जी कोई मामूली क्षत्रप नहीं हैं. अगर मोदी जी यह सोचते हैं कि चुनावी नतीजे विपरीत आने पर ठीकरा योगी जी पर फोड़ दिया जायेगा तो योगी जी भी आसानी से चुप बैठने वाले नहीं, आखिर क्षत्रिय जो ठहरे।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related