केएमसी हॉस्पिटल के कर्मचारी ने लगाये गंभीर आरोप, वायरल किया वीडियो
केएमसी हॉस्पिटल में ऑक्सीजन प्लांट के इंचार्ज ने सीओ ब्रहमपुरी को दी तहरीर
मेरठ। कोरोना मरीजों के इलाज को लेकर सवालों के घेरे में रहे केएमसी हॉस्पिटल के खिलाफ वायरल वीडियो में एक युवक ने खुद को केएमसी का ही कर्मचारी बताते हुए अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमितों को कम मात्रा में ऑक्सीजन सप्लाई दिये जाने पर मरीजों की मौत होने का आरोप लगाया है। युवक ने सीओ ब्रहमपुरी को प्रार्थनापत्र देने के साथ एक वीडियो वायरल कर कहा है केएमसी हाॅस्पिटल ने निर्धारित 50 बेड विपरित 193 कोरोना मरीजों को अपने यहां भर्ती किया था। लेकिन प्रशासन द्वारा 50 मरीजों के हिसाब से दिये जाने वाले ऑक्सीजन सिलेंडरों से काफी कम मात्रा में ऑक्सीजन मरीजों को दी गयी। पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिलने पर अनेक मरीजों ने दम तोड़ दिया। इस गंभीर आरोप की जांच पुलिस- प्रशासन को अवश्य और जल्द से जल्द करनी चाहिये ताकि हकीकत जनता के सामने आ सके।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और सीओ ब्रहमपुरी को दी गयी तहरीर में देवेन्द्र नामक युवक ने खुद को 11 साल से केएमसी हॉस्पिटल का कर्मचारी बताया है। खुद को ऑक्सीजन प्लांट का इंचार्ज बताने वाले देवेन्द्र का कहना है कि 50 कोरोना पेशेंट को भर्ती होने की अनुमति होने के बावजूद केएमसी हाॅस्पिटल ने 193 मरीज तक भर्ती किये। प्रशासन की ओर से 300 ऑक्सीजन सिलेंडर दिये जाते थे जबकि भर्ती 193 मरीजों के लिये 800 सिलेंडर की आवश्यकता थी। ऑक्सीजन सप्लाई का जो प्रेशर 4.1 होना चाहिये था उसे कोविड के समय जबरन 1.5 पर चलवाया गया। ऑक्सीजन कम मिलने के कारण रोजाना 25-30 मरीजों की मौत होती थी।
देवेन्द्र का कहना है कि जब उसने विरोध किया तो उसे जातिसूचक शब्द कहते हुए जान से मारने की धमकी दी। डा.सुनील गुप्ता को बताया तो उन्होंने भी अभ्रदता करते हुए उसके साथ मारपीट की। देवेन्द्र ने पुलिस अधिकारियों से इस मामले की जांच करने की अपील की। देवेन्द्र ने इस बाबत सभी सबूत अपने पास होने का दावा भी किया है। उसका कहना है कि पुलिस चाहे तो वह साथ केएमसी हाॅस्पिटल जाकर अपने आरोपो को सच साबित कर सकता है।
देरी से किये विरोध पर उठते सवाल
खुद को केएमसी का कर्मचारी बताने वाले देवेन्द्र के आरोपों में कितनी सच्चाई है यह तो पुलिस-प्रशासन की जांच के बाद ही पता चल पायेगा। मगर देवेन्द्र का देरी से दिया गया बयान संदेह भी पैदा करता है। जिस समय कोरोना की दूसरी लहर पीक पर थी और बतौर देवेन्द्र केएमसी में रोजाना 25-30 मरीज दम तोड़ रहे थे तब उसने शिकायत क्योंस नहीं की। आज जब प्रत्येक अस्पताल में कोरोना मरीजों और संक्रमण से मौत की संख्या काफी कम हो गयी है तब उसका अपराधबोध क्यों जागा। बतौर ऑक्सीजन प्लांट इंचार्ज जब देवेन्द्र यह जानता था कि कम ऑक्सीजन दिये जाने पर मरीज की मौत हो रही है तो वह इस अपराध में सहयोग क्यों कर रहा था। हालांकि सच क्या है यह तो मामले की जांच के बाद ही सामने आ सकेगा लेकिन लगाये गये आरोप बेहद गंभीर हैं और पुलिस-प्रशासन को इस मामले की जल्द से जल्द जांच करनी चाहिये।

