- कुंभ में भी नहीं दिख रही कुंभनगरी में रौनक
- हर की पैड़ी पर भी नहीं है लोगों की भीड़
हरिद्वार। कोरोना के खौफ के चलते इस साल कुंभ की भव्यता पर भी कोरोना का ग्रहण लग गया है। कुंभ के दौरान भी कुंभनगरी में रौनक नहीं दिख रही है। बाजारों से लेकर होटल-धर्मशालाएं तक खाली सी नजर आ रही हैं। हर की पैड़ी सहित प्रमुख घाटों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम नजर आ रही है। वहीं कोविड गाइडलाइन की पाबंदियों के चलते लोग हरिद्वार आने में कतरा रहे हैं। होटल करोबारियों की मानें तो लगभग 70 प्रतिशत बुकिंग कैंसिल हो चुकी हैं। ऐसे में कारोबार होने की उम्मीद लगाये हरिद्वार के व्यापारियों को नुकसान होने का अंदेशा सता रहा है।
12, 14 और 27 अप्रैल को कुंभ के शाही स्नान हैं। पूर्व में कुंभ मेले के दौरान इन दिनों हरकी पैड़ी समेत सभी प्रमुख घाट, बाजार से लेकर होटल-धर्मशालाएं तक यात्रियों से गुलजार रहते थे। मगर कुछ कोरोना का खौफ और कुछ कोविड गाइडलाइन की पाबंदियों ने श्रद्धालुओं के हरिद्वार आने पर रोड़ा लगा दिया है। ऐसे में शाही स्नान के मात्र 4 दिन रह जाने के बावजूद हरिद्वार में पहले सी रौनक नहीं दिखाई दे रही है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि कुंभ मेले के दौरान शाही स्नान के अलावा भी सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी। मगर अब श्रद्धालु ही नहीं आ रहे जिसका असर उनके कारोबार पर पड़ रहा है। पिछले साल लाॅकडाउन के चलते भारी नुकसान झेल चुके होटल कारोबार को कुंभ मेले में नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद थी। मगर इस साल भी कोरोना के कहर ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। होटल कारोबारियों का कहना है कि कुंभ की नई एसओपी जारी होते ही सत्तर फीसदी बुकिंग पहले ही कैंसिल हो गई थी। अब हालत और बिगड़ गये हैं और जो बुकिंग रह गयीं हैं उनका भी कुंभ मेले में आना मुश्किल लग रहा है। हरिद्वार में कोविड की गाइडलाइन की सख्ती और अन्य राज्यों में बढ़ते कोरोना संक्रमण ने कुंभ की भव्यता को ग्रहण लगा दिया है।

