रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड को अगर आप केवल धार्मिक पर्यटन की नजर से देख रहे है आप बिलकुल गलत है। प्राकर्तिक सौन्दर्य की चादर ओढ़े उत्तराखंड ट्रैकिंग के लिए भी जाना जाता है। यहाँ पर कई ऐसे ट्रैक है जो न केवल अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है वह जगह धार्मिक मान्यताओं को भी अपने आप म समेटे हुए है। ऐसे ही एक ट्रैक के बार म हम आपको बताने जा रहे है जिसका नाम है देवरिया ताल।
Read also: RBI Repo Rate: RBI ने बढ़ाया रेपो रेट, बढ़ेगी EMI, मंहगाई होगी बेलगाम
देवरिया ताल हर समय पर्यटकों के लिए खुला रहता है. इसलिए आप अपने हिसाब स अपना प्लान बना सकते है. ताल की सुंदरता हर साल हजारो सैलानियों को अपनी और आकर्षित करती है। ज्यादातर लोग मई से नवम्बर के बिच में इस सुन्दर झील का आनंद लेते है. यदि आपको बर्फ का आनंद लेना है तो दिसम्बर से लेकर फरवरी आपके लिए बेहतरीन समय होगा। उस समय 10-10 फ़ीट बर्फ आपका स्वागत करने को तैयार रहती है। देवरिया ताल झील का साफ़ पानी और आसपास के घने जंगल रंगबिरंगे फूल, पशु पक्षी आपको देखने को मिल जायेंगे। यह क्षेत्र बुग्यालों के लिए भी जाना जाता है, बुग्यालों की मखमली घास आपके मन को प्रफुल्लित कर देगी।
झील की खूबसूरती
झील के साफ़ पानी में आसपास के पहाड़ियों की बन रहे प्रतिबिम्ब यहाँ के आकर्षण का केंद्र है। चौखम्बा पर्वत का झील पर बनने वाला प्रतिबिंब आपको सकते में दाल सकता है। झील के सामने होने के बाद भी चौखम्बा पर्वत का प्रतिबिम्ब झील पर बनाना अपने आप में एक बड़ा आश्चर्य है। इसके आलावा देवरिया ताल नीलकंठ, केदारनाथ, कालानाग, बंदरपूंछ, चोटियों के प्रतिबिम्ब भी आप झील में देख सकते हो। यह झील आसपास के इलाके में एक मात्र झील है जंहा पर जगली जानवर भी पानी पिने आते है। अगर आपको जंगली जानवरो का दीदार करना है तो रात देवरिया ताल झील प् ही रुकना बेहतर होगा। यहाँ पर कोई होटल या लांज आपको नहीं मिलेगा. यंहा पर आपका ट्रैकिंग गाइड आपके लिए टैंटिंग की व्यवस्था कर सकता है। रात भर जंगली जानवरो के दीदार के बाद आप सुबह पांच बजे झील का नजारा देख आनंदित होंगे। चौंखम्बा पर्वत का प्रतिबिम्ब आपको सकते में डाल सकता है।
Read also: पैगंबर मोहम्मद विवाद: अलकायदा ने दी आत्मघाती हमलों की धमकी
झील की धार्मिक मान्यता
अद्भुत प्राकर्तिक सौन्दर्य से घिरे इस देवरिया ताल को लेकर कई तरह की धार्मिक मान्यता भी जुडी हुई है। मन जाता है की इस ताल में देवता स्नान करने के लिए आया करते थे इसलिए इसक नाम देवरिया ताल पड़ा। यही नहीं इस ताल को महाभारत काल से भी जोड़ कर देखा जाता है। कहा जाता है की इसी ताल पर पांडव जब वनवास में थे तो यक्ष ने यही पर पांडवो की परीक्षा ली थी। कई लोग तो यह भी मानते है की पांडवो ने ही इस ताल का निर्माण कराया था। धार्मिक प्रचलन के मुताबिक देवरिया ताल को इंद्र सरोवर भी कहा जाता है, कहा जाता है की देवराज इंद्र बाकि देवताओं से साथ इस झील में स्नान करने के आते थे इसी वजह से इसका नाम इंद्र सरोवर भी है।

