लखनऊ । प्रदेश में पराली जलाने को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ बेहद सख्त है। पराली मामले पर योगी आदित्यनाथ ने अफसरों को निदेश दिये है कि पराली जलाने को लेकर जागरुकता फैलाकर किसानों को जागरुक किया जाये। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ गलत व्यवहार कतई बदा्रश्त नहीं करेंगे। साथ ही किसानों के नुकसान की जानकारी दी जाये। गौरतलवब है कि उन्नाव में पराली जलाने को लेकर 26 किसानों पर केस लगा हुआ है।
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल ने देश में कहीं भी पराली जलाने को दंडनीय अपराध घोषित किया है।
कई राज्यों में किसानों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जा रही है। कई जगह किसानों ने इन कृषि यंत्रों के जरिए पराली को कमाई का जरिया बनाया है। बाकी किसान भी इनसे सीख ले सकते हैं। किसानों को इन सब जानकारी से अवगत कराना चाहिए। पराली के साथ फसल के लिए सर्वाधिक जरूरी पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ अरबों की संख्या में भूमि के मित्र बैक्टीरिया और फफूंद भी जल जाते हैं। यही नहीं, बाद में भूसे की भी किल्लत बढ़ जाती है।
दिल्ली सीएम भी पराली पर बोले
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने पराली जलाने के साथ किसानों पर हो रहे मुकदमे पर भी पर चिन्ता व्यक्त की। केजरी ने कहा है पड़ोसी राज्य सरकारें पराली जलाने वाले किसानों पर मुकदमे कर रहीं हैं और उन्हें गिरफ्तार भी कर रहीं हैं। मेरी सभी सरकारों से अपील है कि गरीब किसान को सताया ना जाये। केजरीवाल ने बताया कि सभी किसानों की हमसब को इज्जत करनी चाहिए। सरकार की तरफदारी करते हुए अरविंद ने कहा है कि दिल्ली सरकार ने इस साल खेतों में फ्री में इस घोल का छिडक़ाव करवाया है। यह घोल बहुत सस्ता भी है। इस घोल को अन्य रा’य सरकारों की मदद से किसानों को मुफ्त म दी जानी चाहिए।
किसान “क्यों जलाते है पराली”
दिल्ली के आसपास के राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों में पराली जलायी जाती है। अप्रैल में गेहूं एवं मध्य सितम्बर के बाद धान की फसल उठायी जाती है। इस दौरान ही पराली जलायी जाती है। धान जिसके तुरंत बाद गेहूं की फसल की बुआई करनी होती है जिसके लिए खेत का साफ होना अति आवश्यक होता है क्यों कि जब तक खेत साफ न हो उसमें अच्छी बुआई नहीं हो सकती। पराली जलाने का सबसे मुख्य कारण ये भी है कि अगर धान की पराली को खेत में ही छोड़ दिया जायं तो इसके गलने में बहुत समय लगेगा जिससे दूसरी फसलों में भी समस्या आ जाती है। धान के एक्स्ट्रा को पराली कहा जाता है।
डब्ल्यू एचओ भी कर चुका है निंदा
कुछ साल पहले ही डब्ल्यू एचओ की जारी रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि दिल्ली देश की ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे प्रदूषित नगरी है इस प्रदूषण का मुख्य कारण खेतों में जलने वाले पराली ही है। दुनिया भर में 2015 में 90 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण से हुई जिन्में अकेले भारत में 25 लाख मौते हुई। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आकड़ों से साफ नजर आता है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण सेहत के लिए खतरनाक स्तर पर है।
पराली का धुआं अक्टूबर और नवम्बर के महीनों में खतरनाक औैर हो जाता है, क्योकि इन महीनों में हवा की गति कम हो जाती।

