बीजिंग। ताइवान मामले पर युद्ध और उस स्थिति में पश्चिमी देशों की संभावित प्रतिक्रिया के लिए चीन को खुद को तैयार कर लिया है। खास कर चीन के वित्तीय अधिकारी तैयारियों में जुटे हैं। चीन को इस बात का आभास है कि युद्ध की स्थिति में पश्चिमी देश चीन पर सख्त प्रतिबंध लगा देंगे। जिस तरह रूस को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय भुगतान के सिस्टम स्विफ्ट से बाहर किया था। वैसा सलूक चीन के साथ किया जाएगा। चीन को इस बात का अंदेशा है कि युद्ध की हालत में पश्चिम में मौजूद चीनी करेंसी को जब्त कर लिया जाएगा। एक रिपोर्ट के अनुसार चीन उन स्थितियों के लिए तैयारी कर रहा है। वह अंतरराष्ट्रीय कारोबार में अमेरिकी मुद्रा डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए कदम उठा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार डॉलर पर अपनी निर्भरता से चीन पहले से असहज था, लेकिन अब निर्भरता को घटाने के प्रयास में वह युद्धस्तर पर जुटा है।
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चीन अपनी डिजिटल करेंसी लॉन्च करने में जो बढ़त हासिल की थी, वह अब उसके काम आ रही है। चीन टेक्नोक्रेट ऐसे भुगतान सिस्टम विकसित करने में जुटे हुए हैं। जिससे प्रतिबंध लगने के बाद ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए चीन भुगतान करना संभव बना रहे। तकनीक विशेषज्ञों के अनुसार अगर चीन ये सिस्टम बनाने में सफल रहा, तो अमेरिका के लिए कारोबार को बाधित करना बहुत कठिन होगा। इसके अलावा इस सिस्टम के माध्यम से चीन लंबी अवधि में अपनी मुद्रा युवान को अंतरराष्ट्रीय कारोबार की मुद्रा के रूप में प्रचलित कर सकेगा।

