- रेगुलर क्लासेस न होने की वजह से पढ़ाई प्रभावित
- मोबाइल व बीमारी बनी सबसे बड़ी वजह
अमित बिश्नोई
2 सालों से कोरोना महामारी ना केवल लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रही है बल्कि मासूम बच्चों का भविष्य भी अधर में जा लटका है। 2 साल से चल रही ऑनलाइन क्लासेज के नाम पर होने वाली पढ़ाई लचर साबित हो रही है ।
ऑनलाइन टेक्नोलॉजी की सुविधा सभी जगह न होने की वजह से कई प्रतिशत बच्चे शिक्षा ही नहीं ग्रहण कर पा रहे हैं। स्थिति यह है कि 70 से 80 प्रतिशत बच्चे जहां कुछ नया नहीं सीख पा रहे वहीं करीब 50 प्रतिशत बच्चे क्लासेस से ही दूर हैं। यह हालात किसी एक जिले के नहीं है। अमूमन पूरे यूपी में कमोबेश यही स्थिति है।
नहीं है मोबाइल व अन्य सुविधाएं
प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कई प्रतिशत बच्चे शिक्षा ले ही नहीं पा रहे हैं। इसकी वजह इन इलाकों में मोबाइल या इंटरनेट का ना होना है। प्रदेश के करीब 70 प्रतिशत इलाके आज भी ऐसे हैं, जहां घरों में या तो स्मार्ट मोबाइल फ़ोन ही नहीं है या सिर्फ एक ही मोबाइल है। इसमें भी नेटवर्क प्रॉपर न होने की वजह से इंटरनेट व्यवस्था बाधित रहती है। ग्रामीण इलाकों के बच्चे ऑनलाइन क्लासेज अटेंड कर ही नहीं पाते और वह लगातार पढ़ाई में पिछड़ रहे हैं। ग्रामीण इलाके के लोगों का कहना है कि घर में एक ही फ़ोन होता है। बच्चों को कैसे दे सकते हैं। वहीं काफी लोगों का ये भी कहना है कि गांवों में घर परिवार के अधिकतर सभी लोग काम करने वाले होते हैं। बच्चों के हाथ में अकेले मोबाइल नहीं दिया जा सकता। ऑनलाइन पढ़ाई भी बच्चों को समझ नहीं आती। जिसकी वख से वह पढ़ाई में लगातार पिछड़ रहे हैं ।
घर घर बीमारी भी बनी वजह
कोरोना वायरस की दूसरी लहर गांव- गांव में फैली है। बीमारी का असर घर घर हुआ है और बच्चों की ऑनलाइन क्लासेस भी इससे प्रभावित हुई हैं। प्रदेश के कई इलाकों में घर-घर लोग बीमार है. बच्चे या तो घर की देखभाल में व्यस्त हैं या तीमारदारी कर रहे हैं। ऐसे में बच्चे क्लास करने से बच रहे हैं। स्कूल संचालकों का कहना है ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं होती है। बच्चे समय से कनेक्ट नहीं कर पाते हैं जिससे उनकी पढ़ाई काफी ज्यादा प्रभावित हो रही है।
भूल रहे क, ख,ग
पिछले 2 साल से स्कूल के रेगुलर पढ़ाई बाधित होने की वजह से बच्चे अब क, ख, ग तक भूल रहे हैं। छोटे बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई बहुत मुश्किल साबित हो रही है। पेरेंट्स का कहना है की ऑनलाइन क्लासेज में बच्चे कुछ समझ नहीं पाते ऐसे में पिछला पढ़ा हुआ सब भूल जा रहे हैं। पेरेंट्स को पढ़ाई के लिए ख़ुद जुटना पड़ रहा है। अभिभावक कहते हैं कि छोटे बच्चे क्लास के ऑफलाइन मोड में ही पढ़ पाते हैं। दूसरे बच्चों के साथ टीचर को सामने देख कर जो पढ़ाई होती है वो ऑनलाइन में संभव नहीं हो रही है।

