सपा का चरित्र व चेहरा हमेशा ही रहा दलित-विरोधी: मायावती

उत्तराखंडसपा का चरित्र व चेहरा हमेशा ही रहा दलित-विरोधी: मायावती

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सपा का चरित्र व चेहरा हमेशा ही रहा दलित-विरोधी: मायावती

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक उथल पुथल शुरू हो गई। इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमों ने अपने विधायकों के सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलने को लेकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि, घृणित जोड़तोड़, द्वेष व जातिवाद आदि की संकीर्ण राजनीति में माहिर समाजवादी पार्टी द्वारा मीडिया के सहारे यह प्रचारित करना कि बसपा के कुछ विधायक टूट कर सपा में जा रहे हैं, यह घोर छलावा है।

उन्होंने आगे कहा कि, उन्हें काफी पहले ही सपा व एक उद्योगपति से मिलीभगत के कारण राज्यसभा के चुनाव में एक दलित के बेटे को हराने के आरोप में बसपा से निलंबित किया जा चुका है। सपा अगर इन निलंबित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार होती तो वह अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती। क्योंकि इनको यह मालूम है कि बसपा के यदि इन विधायकों को लिया तो सपा में बगावत व फूट पड़ेगी, जो बसपा में आने को आतुर बैठे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि, जगजाहिर तौर पर सपा का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा ही दलित-विरोधी रहा है, जिसमें थोड़ा भी सुधार के लिए वह कतई तैयार नहीं है। इसी कारण सपा सरकार में बसपा सरकार के जनहित के कामों को बंद किया गया। खासकर भदोही को नया संत रविदास नगर जिला बनाने को भी बदल डाला, जो अति-निन्दनीय है।

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उन्होंने आगे कहा कि, वैसे बसपा के निलंबित विधायकों से मिलने आदि का मीडिया में प्रचारित करने के लिए कल किया गया सपा का यह नया नाटक यूपी में पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी ज्यादा लगती है। यूपी में बीएसपी जन आकांक्षाओं की पार्टी बनकर उभरी है, जो जारी रहेगा।

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