Chaos Due to Bumper Crowd in Uttarakhand: सीएम आदेश को हवा में उड़ाते मंत्री, यात्रा मार्ग व्यवस्थाओं को लेकर नही दिखे गंभीर

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देहरादून। उत्तराखंड में मंत्री मुख्यमंत्रियों के आदेशों को लेकर कितना गंभीर है इस बात की बानगी चार धाम यात्रा के दौरान दिखाई दी। जंहा यात्रा पर उम्मीद से भी अधिक भीड़ आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने  अपने 2 कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और डॉक्टर धन सिंह रावत को चारधाम यात्रियों की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए तैनात किया। लेकिन मंत्रियों की गंभीरता तो देखिए कि एक मंत्री 3 दिन बाद ही वापस राजधानी लौट आए तो वही दूसरे मंत्री यात्रा  मार्ग पर गए ही नही। पहले से ही यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर हमलावर विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक मौका ओर मिल गया है। कांग्रेसी विधायक प्रीतम सिंह इसे सरकार और मंत्रियों के बीच समन्वय न होने की बात कह रहे है। 

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कोविड के दो साल के प्रतिबंध के बाद खुली चारधाम में अब तक सारे रिकॉर्ड टूटते हुए दिखाई दे रहे है। बम्पर भीड़ के चकते व्यवस्थाएं भी नाकाफी साबित हो रही है और अव्यवस्थाओं की हवा को कम करने के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपने दो चहेते मंत्रियों को यात्रा व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन मंत्रियों की सीएम आदेश को लेकर गंभीरता तो देखिए एक मंत्री तीन दिन में वापस तो दूसरे मंत्री तो व्यवस्थाओं का जायजा लेने गए ही नही। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने केदारनाथ में व्यवस्थाओं का जायजा लेकर लौटने के बाद मीडिया को अपना बयान देते हुए कहा कि उन्होंने केदारनाथ यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा की ओर उसके बाद व्यवस्थाओं को ओर भी दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए है।

हालांकि धन सिंह रावत को यात्रा मार्ग पर 22 मई तक प्रवास करने की बात सामने आ रही थी लेकिन वे महज 3 से चार दिन में ही वापस राजधानी लौट आए। राजधानी लौटने के बाद धन सिंह रावत ने उन्होंने बताया कि रामबाड़ा में जितने लोगों के रुकने की व्यवस्था होगी उतने ही लोग रामबाड़ा पहुंचने दिया जाएगा। इसी तरह से गुप्तकाशी में भी उतने ही लोग पहुंचेंगे जितने लोगों के रुकने की व्यवस्था होगी।

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 दूसरी ओर विभागों को लेकर पहले से नाराज चल आरहे कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने तो यात्रा मार्ग की तरफ झांक कर भी नही देखा। उन्हें गंगोत्री-यमनोत्री यात्रा मार्ग की व्यवस्थाओं का जिम्मा दिया गया था। हालांकि इस बात को लेकर बयान तो दूर की बात मीडिया से ही दूरी बनाई रखी। ऐसे में इस तरह यात्रा व्यवस्थाओं का हाल भगवान भरोसे ही है। यही वजह है कि विपक्ष एक बार फिर यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर सरकार पर हमलावर हो गया है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने सरकार और मंत्री के बीच समन्वय न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास यात्रा को लेकर किसी भी तरह का कोई रोडमैप नही था। उन्होंने कहा कि सरकार को जब अंदाज था कि यात्रा में यात्री ज्यादा आएंगे तो व्यवस्थाएं भी उसी हिसाब से होनी चाहिए थी।

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