हेमंत सोरेन के इस्तीफे और फिर ED द्वारा गिरफ़्तारी के बाद झारखंड में आया राजनीतिक संकट आज उस वक्त खत्म हो गया जब मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने फ्लोर टेस्ट पास करके मज़बूती से अपनी सरकार बचा ली। चंपई सरकार ने विधानसभा में वोटिंग के दौरान 47 विधायकों का समर्थन हासिल कर भाजपा के मंसूबों पर पानी फेर दिया, विश्वासमत के विरोध में 29 वोट पड़े। बता दें कि हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद चंपई सोरेन को झारखण्ड मुक्ति मोर्चा विधायक दल का नेता चुना गया था. चंपई सोरेन बार बार राज्य के राज्यपाल से सरकार बनाने का न्योता मांग रहे थे, चंपई सोरेन दो बार विधायकों को लेकर गवर्नर हाउस भी गए मगर राज्यपाल महोदय उन्हें जल्द बुलाने कहते हुए टालते रहे. बाद में उन्होंने चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई और 5 जनवरी को विश्वासमत हासिल करने को कहा था.
बहुमत परीक्षण विधानसभा स्पीकर की अगुवाई में हुआ, चंपई सोरेन सरकार के पक्ष में 47 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 29 वोट। बहुमत साबित करने के लिए चंपई सोरेन को सिर्फ 41 विधायकों का समर्थन चाहिए था। इसे हेमंत सोरेन की पार्ट-2 सरकार कहा जा रहा है , मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने भी आज कहा था कि वो हेमंत सोरेन का ही दूसरा रूप है. विश्वासमत के दौरान उन्होंने आज हेमंत सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और कहा कि हमारी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार की योजनाओं से जन-जन को जोड़ा गया है।
विश्वासमत में शामिल होने पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी आज विधानसभा पहुंचे और चंपई सोरेन का समर्थन किया। झारखण्ड में पिछले कई दिनों से रिसोर्ट पॉलिटिक्स जारी थी. हेमंत सोरेन के इस्तीफे और चंपई सोरेन के नेता बनने के फ़ौरन बाद JMM विधायकों को हैदराबाद शिफ्ट कर दिया गया था. बीच में उन्हें रांची लाकर राज्यपाल के सामने परेड कराने की कोशिश की गयी लेकिन राज्यपाल के इंकार के बाद उन्हें फिर वापस भेज दिया गया. ये सारे विधायक कल रात ही रांची लौटे हैं. भारत जोड़ो न्याय यात्रा आज रांची में है , विश्वासमत हासिल करने के बाद राहुल गाँधी ने मुख्यमंत्री चंपई सोरेन को बधाई दी।

