पैगंबर मोहम्मद को लेकर भाजपा नेताओं के आपत्तिजनक बयान के विरोध में उत्तर प्रदेश में हुई हिंसक घटनाओं के बाद सरकार द्वारा आरोपियों पर की गयी बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जमीयत-उलमा-ए-हिंद की याचिका पर सुनवाई अगले हफ्ते तक टल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से हलफनामा मांगा है जिस पर योगी सरकार ने 3 दिन का वक्त मांगा. सुनवाई अगले हफ्ते टालने के साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार कानून के मुताबिक कार्रवाई करे.
बता दें कि बुलडोज़र कार्रवाई के खिलाफ जमीअत उल्माए हिन्द ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, अपनी याचिका में मुस्लिम संगठन ने यूपी सरकार पर जानिब्दाराना कार्रवाई का आरोप लगाया और कहा कि सरकार एक ख़ास समुदाय को इन मामलों में टारगेट कर रही है. जमीअत का कहना है किसी के जुर्म की सजा के तौर पर उसके घर को गिराना गैरकानूनी है. जमीअत के वकील ने ऐसी किसी भी कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि लोगों को सुनवाई करने का मौका दिया जाए.
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वहीँ यूपी सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा कहा गया कि किसी भी समुदाय विशेष के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है, ध्वस्तीकरण की जो भी कार्रवाई हुई है उसके लिए पहले नोटिस भेजा गया था, नोटिस का जवाब न देने पर यह कार्रवाई की गयी. वहीँ याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार की इस दलील को चैलेंज करते हुए कहा कि डिमोलिशन के मामले में सरकार 10 का नोटिस देने की बात कह रही है, जबकि कानूनन 15 दिन का नोटिस और 40 दिन का समय देना चाहिए ताकि पीड़ित पक्ष को डिमोलिशन रुकवाने का एक मौका मिल सके
याचिकाकर्ता पक्ष की और से कहा गया कि जो भी मकान तोड़े गए वह दशकों पुराने थे, इनमें से कई मकान सिर्फ आरोपों के आधार पर तोड़ दिए गए, कुछ मकान तो आरोपी के नाम भी नहीं थे, उन्हें किस आधार पर तोड़ा गया. वहीँ सरकार इनके ध्वस्तीकरण की वजह अवैध निर्माण बता रही है, लेकिन सवाल उठता है कि जो मकान 20 वर्षों से वैध था वह अचानक अवैध कैसे हो गया.

