उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आज हलफनामा दाखिल कर कहा है कि दंगों के आरोपियों का बुलडोज़र की कार्रवाई से कोई लेना देना नहीं। बुलडोज़र की जो भी कार्रवाई हो रही है वह नियमतः और कानून के तहत हो रही है. जिनकी भी सम्पतियों पर बुलडोज़र चलाया गया है उनको कार्रवाई से पहले नोटिस दी गयी है और उसके बाद ही बुलडोज़र की कार्रवाई की गयी हैं. यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से जमीअत उल्माए हिन्द की याचिका को जुर्माना लगाकर ख़ारिज करने की अपील की.
बता दें कि पैग़म्बर मोहम्मद पर भाजपा नेताओं की टिप्पणियों के बाद प्रयागराज में हुए बवाल में मुख्य आरोपी बनाये गए जावेद मोहम्मद के घर पर योगी सरकार ने बुलडोज़र चला दिया। जानकारी के मुताबिक यह घर जावेद मोहम्मद के नाम भी नहीं है और लगभग 20 वर्ष पुराना है। योगी सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ जमीअत उल्माए हिन्द ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि यूपी सरकार एक समुदाय विशेष को निशाना बनाकर उनके मकानों पर बुलडोज़र चला रही है. जमीअत की याचिका पर सुनवाई करते हुए 16 जून को शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार को नोटिस जारी करते हुए हलफनाम दाखिल करने को कहा था.
यूपी सरकार की ओर से आज 63 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया गया जिसमें कहा गया कि अवैध निर्माण को गिराने की प्रक्रिया काफी दिनों से चल रही है. हलफनामे में कहा गया कि बुलडोज़र की सारी कार्रवाई कानून सम्मत हुई है. हलफनामे में यह भी कहा गया है कि जमीअत एक समुदाय विशेष पर बदले की कार्रवाई का झूठा आरोप लगा रही है, इस मामले में भी कोई प्रभावित पक्ष सामने नहीं है. हलफनामे में कहा गया गया कि जिस जावेद मोहम्मद की बात की जा रही है उसके खिलाफ यह कार्रवाई दंगे की वजह से नहीं की गयी , उसे नोटिस भेजकर अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया और सारी प्रक्रिया का पालन किया गया. हलफनामे में कहा गया कि जमीअत के आरोप बेबुनियाद हैं और उनकी याचिका को ख़ारिज कर देना चाहिए और अदालत को उनपर जुर्माना भी लगाना चाहिए।
