एक तरफ जहां भारतीय सेना में भर्ती की नई योजना अग्निपथ का देश में चारों ओर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। वहीं अब इसके बारे में सेन्य मसलों के जानकारों से भी विश्लेशष करना शुरू कर दिया है। आज भाजपा सरकार अग्निपथ योजना को जहां सेना के लिए कारगर बता रही है। वहीं युवकों के भी रोजगार के अवसर खोलने का साधन बता रही है। लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या अग्निपथ के अग्निवीर दुश्मन देशों में उसी तरह का खौफ बरकरार रख सकेंगे जैसा कि आज बना हुआ है। क्या पाकिस्तान और चीन आज की तरह ही भारतीय सेना से थर्राएंगे। यह तो भविष्य के गर्त में छुपा है। लेकिन अभी अग्निपथ के विरोध प्रदर्शन के बीच अब राजनीति भी शुरू हो चुकी है। अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए अग्निवीरों को सालाना पैकेज के साथ ही चार साल बाद रेगुलर कैडर के लिए अप्लाई करने का आप्शन दिया है। सेना में एक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों यानि सैनिकों को स्थायी नौकरी मिल सकेगी। यानि 75 प्रतिशत को कोई मौका नहीं होगा।
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अगर अग्निवीर भर्ती युवा वायु सेना या नौसेना में जाना चाहें तो उन्हें ट्रेनिंग अलग से दिलवाई जाएगी। लेकिन किसी को किसी तरह की पेंशन आदि की सुविधा नहीं होगी। ‘सेवा निधि’ का फायदा बीमा के जरिए ही मिलेगा। इस फंड के लिए अग्निवीरों की मासिक सैलरी का 30 प्रतिशत हिस्सा हर महीने काटा जाएगा। ये ‘सेवा निधि’ में जमा होगा। सेवा के दौरान अग्निवीर शहीद होता है तो अग्निवीरों को 48 लाख रुपए के साथ नौकरी मिलेगी।
इसे अतिरिक्त अनुग्रह राशि का नाम दिया
बहरहाल कुल मिलाकर अब देश की तीनों सेनाओं में जो भर्तियां होंगी। वो अग्निपथ योजना के तहत होंगी। यह नई भर्ती 90 दिन के भीतर शुरू हो जाएगी। अग्निवीरों का पहला बैच 2023 में तीनों सेना में नजर आएगा। अग्निपथ योजना के अंतगर्त साढ़े 17 साल से लेकर 23 साल तक के युवा भर्ती हो सकेंगे। यह तो वो जानकारी है जो सरकार की ओर से दी गई। लेकिन सवाल है कि इससे भारत की सैन्य शक्ति का दुश्मन देशों में क्या खौफ उतना रह पाएगा,जितना अब तक है। एक तरफ चीन ने भारत की जमीनों पर गांव बसा दिए, पुल बनाए और बंकर बना दिए सड़कें भी बना रहा है। तो वहीं नेपाल द्वारा भी भारत की जमीन हथियाने की जानकारी भी आ रही हैं। सवाल है कि जब सेना में इस तरह की भर्तियां होगी तो फिर देश की रक्षा क्या उतनी मजबूती से हो सकेगी? दुश्मन देशों में भारत का उतना खौफ रह सकेगा क्या?

