किसानों के समर्थन के साथ भाई की ब्रॉन्डिंग भी

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किसानों के समर्थन के साथ भाई की ब्रॉन्डिंग भी

  • नवेद शिकोह
किसानों के समर्थन के साथ भाई की ब्रॉन्डिंग भी

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की नाराजगी को कांग्रेस ने सबसे बड़ा मुद्दा बनाया है। भाई राहुल गांधी और बहन प्रियंका गांधी किसान आन्दोलन की फसल को अपने पसीने से सींच रहे हैं। दोनों भाई-बहन अपने-अपने तरीके से किसानों के समर्थन में सरकार पर हमलावर हो रहे हैं।

सरकार के खिलाफ और किसानों के फेवर में संसद से सड़क तक कांग्रेस कोहराम मचा देना चाहती है। देश के सबसे बड़े इस विपक्षी दल का मकसद है कि किसानों के हक की आवाज सड़क पर इतनी बुलंदी से गूंजे कि इसकी गूंज संसद तक पंहुचे। और संसद में इतने दमदार तरीके से किसानों की तकलीफों की बात रखी जाए कि अपने अधिकारों के लिए सड़क पर बैठे किसानों को ढांढस हो, और उनकी हिम्मत-हौसला बढ़े। संसद से लेकर सड़क तक कि ये तमाम बुलंद आवाजें आम इंसानों के कानों तक पंहुच कर किसान आंदोलन में आम भागीदारी पैदा करें।

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के नजदीकी विधानसभा चुनाव के लिए किसानों की नाराजगी को अपना मुख्य मुद्दा बना लिया है। कृषि कानूनों से रूठे किसानों की नाराजगी की फसल उगाने के लिए कांग्रेस ने अपनी हमदर्दी का खाद-पानी देने का सिलसिला तेज़ कर दिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों/जाटों की खाप पंचायतों के दौरान यहां कांग्रेस की महापंचयतों में कांग्रेस नेत्री और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने पश्चिम में डेरा डाल दिया है। मेरठ में आयोजित कांग्रेस की महापंचयत में प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने भाई राहुल गांधी के आक्रामक वक्तव्यों को दोहराया। इस बात का अहसास कराने की कोशिश की कि कांग्रेस महासचिव/सांसद राहुल गांधी किस तरह आंदोलनकारी किसानों की नुमाइंदगी कर रहे है। मोदी सरकार पर तंज़ करने वाले राहुल के सटायर- “हम दो हमारे दो” को दोहराते हुए प्रियंका ने मेरठ में किसान महापंचायत में दोहराया कि दो मित्र सरकार चला रहे हैं। अपने भाई का दोबारा जिक्र करते हुए प्रियंका ने कहा कि राहुल गांधी ने संसद मे शहीद किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए मौन रखने के लिए आग्रह किया तो सरकार का एक भी सांसद श्रद्धांजलि देने के लिए खड़ा नहीं हुआ। कांग्रेस की यूपी प्रभारी ने कहा कि करीब दो सौ पच्चीस किसान शहीद हो चुके हैं। किसान सौ दिन से धरने पर बैठे हैं और सरकार बेफिक्र है। प्रियंका ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने परेशान किसानों का मज़ाक उड़ाया है। अपने हक़ के लिए शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे किसान भाइयों को आंदोलनजीवी जैसे उल्टे-सीधे शब्द कहे।

प्रिय़का गांधी गांव-गांव, किसान-किसान.. तक पंहचकर यूपी में कांग्रेस का खोया जनाधार वापस लाना चाहती हैं। वो गांव और किसानों के बीच अपनी मौजूदगी का हर अपडेट सोशल मीडिया पर भी प्रस्तुत करती हैं ताकि यदि मीडिया नहीं दिखाए तो सोशल मीडिया के ज़रिये गाँवों के लिए इनका जमीनी संघर्ष शहर तक भी पंहुचे।

मेरठ में किसान महापंचायत में अपने संबोधन को प्रियंका ने अपने फेसबुक पर इस अंदाज में अपडेट किया है-

मेरठ की धरती से आज़ादी की पहली लड़ाई शुरू हुई थी. उस समय भी अंग्रेजी हुकूमत किसानों का शोषण कर रही थी. सैकड़ों किसान शहीद हुए. आज भाजपा सरकार भी किसानों का शोषण करने वाले कानून लाई है. मेहनत किसान करेगा, मुनाफा भाजपा के खरबपति मित्र कमाएंगे।

प्रधानमंत्री जी आज बंगाल में भी बोल रहे होंगे कि इन कानूनों से किसानों को फायदा होगा। जबकि लाखों किसान दिल्ली बॉर्डर पर बैठकर कह रहे हैं कि इन कानूनों से हमें कोई फायदा नहीं है. लेकिन प्रधानमंत्री जी किसानों की नहीं सुनते।

इस बात में कोई शक नहीं कि परिवारवाद और एयरकंडीशन आफिसों और लक्जरी गाड़ियों तक सीमित रहने के आरोपों से हाशिये पर आई कांग्रेस एक बार फिर जमीनी संघर्ष की तरह बढ़ रही है और गांधी परिवार की चौथी पीढ़ी के राहुल और प्रियंका गांधी वाड्रा का जमीनी संघर्ष इतिहास का आईना दिखा रहा है।
भारत छोड़ो आंदोलन.. नमक आंदोलन.. सेवादल.. प्रभातफेरी… इत्यादि जैसे जमीनी संघर्षों के अंकुर कांग्रेसी जमीन पर अभी भी नहीं फूटें तो वो बात अलग है। ऐसे में यही कहा जाएगा- कुछ भी कर लो समय से पहले और भाग्य से ज्यादा कुछ नहीं मिलता।

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